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कफ सिरप केस: ढाई महीने में 42 फर्मों पर प्राथमिकी, महज 12 का निरस्त हुआ लाइसेंस; कार्रवाई की रफ्तार हो गई धीमी

Sun, 21 Dec 2025 06:13 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Cough Syrup Case: कोडिनयुक्त कफ सिरप मामले में सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठने लगे हैं। कार्रवाई की रफ्तार लगातार धीमी होती जा रही है। ड्रग विभाग ने 42 मामले दर्ज किए लेकिन महज 12 का ही लाइसेंस निरस्त हुआ है।
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शुभम जायसवाल, भोला प्रसाद और अमित सिंह टाटा। - फोटो : अमर उजाला
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Varanasi News: कोडीनयुक्त कफ सिरप की जालसाजी की जांच अक्तूबर से चल रही है। ढाई माह में जितनी तेजी से फर्मों की जांच की गई, अब उन पर कार्रवाई की रफ्तार धीमी हो गई है। ड्रग विभाग की ओर से एक के बाद एक 42 फर्मों पर प्राथमिकी तो दर्ज करवा दी गई है लेकिन अब तक केवल 12 का लाइसेंस निरस्त किया जा सका है। इस तरह की स्थिति तब है जब जालसाजी की पुष्टि भी हो चुकी है।

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कफ सिरप की खरीद-बिक्री की जालसाजी के इस खेल में वाराणसी के साथ ही गोरखपुर, प्रयागराज से लेकर पूर्वांचल के जिलों के लोग शामिल हैं। वाराणसी में सबसे अधिक कफ सिरप रांची, झारखंड से मंगाए गए। हैरानी की बात यह है कि केवल कागज पर ही फर्म बनाकर कफ सिरप की आपूर्ति कर दी गई। हां बेचा गया, इसका कोई प्रमाण जांच में नहीं मिला।

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पुलिस ने की कार्रवाई

स्थानीय स्तर पर जांच को लेकर किस तरह की गंभीरता बरती जा रही थी उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद लखनऊ से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त रौशन जैकब को वाराणसी तक आना पड़ा। नवंबर के अखिरी सप्ताह में एडिशनल कमिश्नर रेखा एस चौहान को भी जालसाजी करने वाली फर्मों को खोजने निकलना पड़ा।

रौशन जैकब के निर्देशन में टीम ने 28 फर्मों में जालसाजी का खुलासा एक ही दिन किया था। इसके बाद जांच की रफ्तार धीमी हो गई। कागज पर भले ही स्थानीय स्तर पर अधिकारी कार्रवाई कड़ी होने का दावा कर रहे हैं लेकिन अभी भी प्राथमिकी दर्ज होने वाले 30 फर्मों का लाइसेंस निरस्तीकरण न किए जाने से कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। इन फर्मों का लाइसेंस निरस्त कब होगा, इस पर अधिकारी भी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
जांच की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। अधिकारियों के आदेश पर कार्रवाई की जाएगी। - जुनाब अली, ड्रग इंस्पेक्टर
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