स्थानीय स्तर पर जांच को लेकर किस तरह की गंभीरता बरती जा रही थी उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद लखनऊ से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त रौशन जैकब को वाराणसी तक आना पड़ा। नवंबर के अखिरी सप्ताह में एडिशनल कमिश्नर रेखा एस चौहान को भी जालसाजी करने वाली फर्मों को खोजने निकलना पड़ा।
रौशन जैकब के निर्देशन में टीम ने 28 फर्मों में जालसाजी का खुलासा एक ही दिन किया था। इसके बाद जांच की रफ्तार धीमी हो गई। कागज पर भले ही स्थानीय स्तर पर अधिकारी कार्रवाई कड़ी होने का दावा कर रहे हैं लेकिन अभी भी प्राथमिकी दर्ज होने वाले 30 फर्मों का लाइसेंस निरस्तीकरण न किए जाने से कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। इन फर्मों का लाइसेंस निरस्त कब होगा, इस पर अधिकारी भी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
जांच की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। अधिकारियों के आदेश पर कार्रवाई की जाएगी। - जुनाब अली, ड्रग इंस्पेक्टर