अंतरराज्यीय गिरोह का सरगना शुभम जायसवाल।
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कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े शुभम जायसवाल के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच जारी है। शुभम ने होटल और रियल एस्टेट कारोबार में ही नहीं लगाया, बल्कि उसने पूर्वांचल के कई डायग्नोस्टिक समेत कई हेल्थ सेक्टर में भी निवेश कर रखा था। एजेंसियों की जांच अब उधर भी मुड़ सकती है।
शुभम जायसवाल के इस अवैध नेटवर्क से अर्जित धन मामले में जांच एजेंसियों के हाथ कुछ ठोस सबूत लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि ईडी अब तक जुटाए गए सभी सबूतों को एक साथ संकलित कर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज कराने की तैयारी में है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि अवैध तरीके से कमाई गई रकम को अलग-अलग व्यवसायों में निवेश कर वैध रूप देने की कोशिश की गई।
इसी कड़ी में होटल व्यवसाय, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों में हुए निवेश की परतें खोली जा रही हैं। फिलहाल शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला जायसवाल और पूरे गिरोह से जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों की गहन जांच चल रही है। इसके साथ ही उनके बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन, ऑफलाइन नकद ट्रांकेक्शन और बेनामी संपत्तियों की कुंडली भी खंगाली जा रही है।
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जांच एजेंसियों के हाथ ठोस सुराग लगे हैं। एजेंसियां पता लगाने में जुटी हैं कि सिरप की तस्करी से होने वाली कमाई किन-किन माध्यमों से इधर-उधर की गई और किस तरह से उसे सफेद धन में बदलने का प्रयास किया गया। हालांकि इस मामले में एसआईटी और ईडी के अधिकारी जांच और कार्रवाई पूरी होने तक कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में विपक्ष का एक नेता भी जांच एजेंसियों की रडार पर है। मामले के उजागर होने के बाद से ही उसकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।