गंगा किनारे बसा शहर पानी के लिए परेशान है। जबकि, शहर को पर्याप्त पेयजल मुहैया कराने के लिए आठ सालों में पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। जेएनएनयूआरएम के तहत नई पाइप लाइन बिछाने और ओवरहेड टैंक बनाने की इन योजनाओं का लाभ इस गर्मी में भी शहर को शायद ही मिल पाए। वजह, नई पाइप लाइनों से घरों के कनेक्शन अब तक नहीं जुड़ पाए हैं, दूसरे जो नए ओवरहेड टैंक बने हैं उनकी टेस्टिंग का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। आबादी के लिहाज से आज शहर को 276 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) पानी की जरूरत है जबकि आपूर्ति महज 140 एमएलडी की हो पा रही है। गर्मी से पहले ही अधिकतर मुहल्लों में पानी संकट से लोग परेशान हो उठे हैं। मई-जून के महीनों में हालात और मुश्किल भरे होंगे।
जवाहर लाल नेहरू नेशनल रिन्व्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत शहर में वर्ष 2008 में पेयजल योजना पर काम शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था जल निगम एवं जलकल विभाग की आपसी खींचतान और नियमित काम न होने के चलते आठ साल बाद भी काम अधूरा है। इसके चलते शहरियों को इस गर्मी में भी पेयजल संकट से जूझने के सिवा कोई विकल्प नहीं रह गया है। शहर की आबादी के अनुरूप रोजाना पानी की 135 एमएलडी आपूर्ति कम हो रही है। गर्मी में खपत बढ़ने पर यह अंतर और भी बढ़ जाता है।
जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि जेएनएनयूआरएम के तहत कराए जा रहे कार्यों के पूरा होने के बाद शहर को पर्याप्त पानी मिलने लगेगा लेकिन यह कब तक होगा, यह बताने वाला कोई नहीं। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि जेएनएनयूआरएम के तहत बिछाई गई नई पेयजल पाइप लाइन से अब तक घरों के कनेक्शन नहीं जोड़े जा सके हैं। नए बने ओवरहेड टैंकों का परीक्षण भी अभी पूरी तरह से नहीं हो पाया है। बीच-बीच में परीक्षण हुआ भी तो कहीं टंकी तो कहीं पाइप लाइन में लीकेज की बात सामने आई। जलकल विभाग का कहना है कि कार्यदायी संस्था ओवरहेड टैंक का ठीक तरीके से परीक्षण करे, उसके बाद ही वह उन्हें अपनी सुपुर्दगी में लेगा जबकि जल निगम लगातार काम पूरा होने के दावे कर रहा है।