इसके बाद अस्पताल ने उसे लेने से इनकार कर दिया। इस दौरान पूरी रात शव एंबुलेंस में ही पड़ा रहा। एंबुलेंस चालक और कर्मी गाड़ी खाली होने का इंतजार करते रहे। उनका कहना था कि 108 एंबुलेंस शव ढोने के लिए नहीं है। मगर सुनने वाला कोई नहीं था।
सोमवार को सुबह 10 बजे के बाद पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शव को एंबुलेंस से उतरवाकर गाड़ी को सैनिटाइज कराया। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि कोरोना संदिग्ध मरीज को रखने के लिए अगल से कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए उसे एंबुलेंस में ही रखवाया गया। उसकी सैंपलिंग एंबुलेंस में ही करा दी गई है।