बनारस क्लब में 5 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है जबकि रोडवेज पर 12, बीएलडब्ल्यू में 75 लोगों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अब वहां सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसके अलावा बीएचयू कैंपस में 10, वीआईपी ड्यूटी में तैनात एक समेत कई जगहों पर रहने वाले लोग संक्रमित हुए हैं।
नए अस्पतालों में भर्ती की प्रक्रिया शुरू
बढ़ते मरीजों की संख्या की वजह से कोविड हॉस्पिटल में बेड भी भरने लगे हैं। 319 बेड वाले बीएचयू में ही संख्या 200 के करीब पहुंच गई है। शनिवार से दो नए अस्पतालों को भी शुरू कर दिया गया है जिसमें मरीजों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रभारी सीएमओ डॉक्टर एनपी सिंह ने बताया कि अब तक बीएचयू, दीनदयाल में ही भर्ती की सुविधा थी। अब बीएलडब्ल्यू, हेरिटेज मेडिकल कालेज में भी मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। जैसे जैसे मरीजों की संख्या बढ़ेगी, बेड बढ़ाए जाएंगे।
354 मरीजों के बारे में नहीं मिल पाई कोई जानकारी
बढ़ते मरीजों की संख्या के बीच बहुत से मरीजों का पता नहीं चल पा रहा है। बिना मोबाइल नंबर और गलत पता वाले मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। शनिवार को ऐसे 351 मरीज मिले, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है।
जिला जज सहित 13 न्यायिक अधिकारी कोरोना संक्रमित
न्यायिक अधिकारियों के आवासीय परिसर में कोरोना संक्रमण के लिए कराए गए एंटीजेन टेस्ट में जिला जज समेत 13 न्यायिक अधिकारी संक्रमित पाए गए हैं। यह जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने शनिवार को दी। इतनी ज्यादा संख्या में न्यायिक अधिकारियों के कोरोना पॉजिटिव मिलने पर अदालत कर्मियों में हड़कंप की स्थिति है। इसके साथ ही आगामी दिनों में अदालती कामकाज भी प्रभावित होने की आशंका है।
दीवानी कचहरी को बंद कर सैनिटाइजेशन की मांग
13 न्यायिक अधिकारियों के कोरोना संक्रमित मिलने की सूचना पर बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार पांडेय सकते में दिखे। उन्होंने कहा कि पूरी दीवानी कचहरी खतरे में हैं। हाईकोर्ट से अनुरोध है कि एक सप्ताह तक दीवानी कचहरी को बंद रख कर सैनिटाइजेशन का काम कराया जाए।
वहीं, सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक उपध्याय ने कहा कि कचहरी बंद होने में बाद यह स्थिति है। इसे देखते हुए केवल अति आवश्यक कार्यों को छोड़कर सभी कार्य वर्चुअल माध्यम से हों। सिर्फ उन्हीं को कचहरी परिसर में प्रवेश दिया जाए जिनका बेहद आवश्यक कार्य हो और जो कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करते हुए आएं। सिविल कोर्ट से ही सटे कलक्ट्रेट परिसर में भी नियमित जांच और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था कराई जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।