यहां से दवा लेकर वह घर आ गई। फिर से तबीयत खराब होने पर बीएचयू गई तो बेड नहीं मिला। इस पर दो-तीन प्राइवेट अस्पतालों में दिखाया गया। 18 मार्च को परिजन उसे लेकर लखनऊ स्थित सहारा अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उसे संदिग्ध एच1एन1 और कोरोना की संभावना जताते हुए केजीएमसी रेफर कर दिया। इस पर परिजनों ने कोरोना से संबंधित हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया।
फोन उठाने वाले ने मरीज के रहने के स्थान के बारे में पूछा तो परिजनों ने गांव का पता बता दिया। इस पर हेल्प लाइन नंबर से बताया गया कि गांव की रहने वाली है तो उसे कोरोना नहीं हो सकता है। इसके बाद परिजन घर चले आए। 19 मार्च सुबह चक्रपानपुर मेडिकल कॉलेज ले गए तो डॉक्टर ने फिर से केजीएमसी रेफर किया।
परिजन उसे केजीएमसी ले गए पर बेड नहीं मिलने पर पीजीआई ले गए, वहां डॉक्टर को दिखाने के पहले ही महिला की मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव लेकर घर चले आए। घर आने पर मृतका के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर कुछ आरोप लगा दिया तो मामला थाने पर पहुंच गया और समझौते के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
शुक्रवार की शाम शव का पोस्टमार्टम भी हो गया। पोस्टमार्टम के बाद मृतका के संदिग्ध पीड़ित होने की बात सामने आई तो स्वास्थ्य महकमे के होश उड़ गए। उधर, पोस्टमार्टम करने वाले कर्मचारियों को पोस्टमार्टम में प्रयुक्त सारी चीजें निर्देश देकर जलवा दी गई। मुख्य रूप से पीएम करने वाले व्यक्ति ने बताया कि सीएमओ व फार्मासिस्ट के निर्देश महिला के पीएम में प्रयुक्त सामानों को नष्ट करा दिया गया है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि महिला काफी दिनों से बीमार थी, उसमें एच1एन1 के लक्षण पाए गए हैं। जहां तक कोरोना की बात है तो यह जांच का विषय है। परिवार को क्वारंटाइन करा दिया गया है। घर पर ही रहने की हिदायत दी गई है। उसके इलाज की रिपोर्ट परिजनों से मांगी गई है। इसके आधार पर ही कुछ स्पष्ट किया जा सकेगा।
ससुराल और मायका भी कोरेंटाइन
संदिग्ध पीड़िता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मृतका के ससुराल व मायके में डॉक्टरों की टीम भेज कर परिवार के अन्य सदस्यों को होम कोरेंटाइन करा दिया है। गांव में दवाओं का छिड़काव कराने के साथ ही साफ-सफाई को लेकर लोगों को जागरूक भी किया गया। सीएचसी कोल्हुखोर प्रभारी डॉ. धनंजय के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम दोनों गांवों में पहुंची थी।