यह इस सप्ताह इंटरनेशनल जर्नल इंफेक्शन, जेनेटिक्स एंड इवॉल्यूशन में प्रकाशित हुआ है। रुद्र कुमार पांडेय ने बताया कि फाइलोजेनेटिक एनालिसिस के आधार पर देखा गया कि भारत के लोग इस जीन के लिए पश्चिमी यूरोपीय लोगों की तरह संवेदनशीलता दिखा रहे हैं, जो कि कोविड-19 से होने वाली मौतों को बढ़ा रहा है।
पिछले साल इसी टीम ने एसीई-2 जीन पर व्यापक विश्लेषण में एक म्यूटेशन रिपोर्ट किया था जो दक्षिण एशिया के लोगों को कोविड-19 से सुरक्षा प्रदान कर रहा था। बीएचयू के विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अनिल कुमार त्रिपाठी ने इस शोध के लिए बधाई दी है।