वाराणसी। कोविड अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लेने आई स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम द्वारा अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर बताई गई कमियों को दूर करने में अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा जुट गया है। जिस तरह समय-समय पर अस्पतालों को नोटिस जारी कर मेडिकल वेस्ट निस्तारण का निर्देश दिया जाता है उसके बाद भी कमियों को दूर करना चुनौती से कम नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट नई दिल्ली से आईं डॉ. नीलम और डॉक्टर देवाशीष परमार की टीम ने जिले में अस्पतालों का दौरा कर यहां बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण सही तरीके से निस्तारण न होने की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। शनिवार को जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के निर्देश पर एडीएम प्रोटोकॉल बच्चू लाल और स्वास्थ विभाग की ओर से इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी के सदस्य डॉ. अतुल सिंह ने एमएस से मुलाकात कर आईपीसी प्रोटोकॉल के तहत बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण किए जाने की बात कही। साथ ही मरीजों के इलाज, भोजन की गुणवत्ता, समय-समय पर मॉनिटरिंग करने का भी सुझाव दिया। इस दौरान टीम के सदस्यों ने सुपर स्पेशलिटी कांप्लेक्स में कोरोना मरीजों के इलाज की भी जानकारी ली। बताया जा रहा है कि अन्य कोविड अस्पतालों में भी दौरा होगा।
नवजात बच्चों की सुविधा में मिलेगी सहूलियत, तीन और वेंटिलेटर आएंगे
वाराणसी। सर सुंदरलाल अस्पताल के एनआईसीयू में बेहतर क्षमता वाले वेंटिलेटर को लगाया गया है और जल्दी ही यहां तीन और वेंटिलेटर मंगाए जा रहे हैं। अब तक यहां वेंटिलेटर की सीमित क्षमता होने से बच्चों के इलाज में परेशानी भी आती थी। एनआईसीयू के प्रभारी प्रो.अशोक कुमार ने बताया कि इसके बाद नवजात बच्चों के इलाज में काफी सहूलियत होगी। आमतौर पर समय से पहले जन्मे बच्चे और जन्म के तुरंत बाद बच्चों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है। खास तौर पर 1 किलोग्राम से कम वजन के बच्चों को वेंटिलरी सपोर्ट यानी श्वास संबंधी सपोर्ट देना पड़ता है। पुराने वेंटीलेटर आवश्यकता से ज्यादा मात्रा में हवा प्रवाहित करते हैं ऐसे में फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है। बच्चों के बेहतर इलाज को देखते हुए ही नए वेंटिलेटर मंगाए गए हैं। अस्पताल के एमएस डॉ. एस के माथुर ने बताया कि नए वेंटिलेटर के आने के बाद अस्पताल उन अस्पताल में शामिल हो गया है जहां बेहतर क्षमता वाले वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है।