मिनट के भाषण में युवाओं को मिले कामयाबी के पांच मंत्र
बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में शनिवार को कुमार मंगलम ने 15 मिनट तक दीक्षांत भाषण में कहा कि कामयाबी पाने के लिए तैयारियां शुरू कर दें। रास्ते बन चुके हैं। उन्होंने पांच आसान मंत्र भी बताए। तकनीक, युवा आबादी, एआई, उद्यमिता और महत्वाकांक्षाएं कई बड़े मौके पैदा करेंगी जिसकी कल्पना पिछली पीढि़यों ने नहीं की होंगी। कोई एल्गोरिद्म ऐसा नहीं है जो आपकी मेहनत को खराब कर दे।
फिल्मी डायलॉग को जिंदगी के इर्द-गिर्द बताया : चेयरमैन ने मेडलिस्ट को समझाने के लिए फिल्मों के डायलाॅग बोले। कहा, रिस्क है तो इश्क है, ‘अपना टाइम आएगा’ और ‘जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं’। भले ही ये फिल्मी डायलॉग हों लेकिन कई सफल उद्यमियों की जिंदगी इसके इर्द-गिर्द रही है। इन्हें सफलता मिली क्योंकि इनके पास अपने फैसले खुद लेने का साहस था। जोखिम उठाए बिना कुछ बड़ा हासिल नहीं होगा।
अरबपति लैरी फिंक की असफलता, अंत नहीं शुरुआत थी : चेयरमैन ने अमेरिकी अरबपति लैरी फिंक के कॅरिअर और ब्लैकरॉक कंपनी की स्थापना में आई व्यावसायिक असफलता का उदाहरण दिया। प्रोफेशन में आगे बढ़ने के लिए चुनौतियों को स्वीकार करें। असफलता अंत नहीं शुरुआत है। पूरे जीवन सीखना अब सिर्फ एक आकांक्षा नहीं, बल्कि सफलता और प्रासंगिक बने रहने की सबसे बड़ी जरूरत है।
मौके आएं तो सिर्फ सुरक्षित रास्ता ही न खोजें : उन्होंने कहा कि एआई के दौर में अब काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव लाने वाला है। ऐसे में सिर्फ तकनीकी रूप से मजबूत होने से कुछ बड़ा नहीं होगा। लोगों की संवेदनाओं, हर विषय की समझ और परिस्थिति को देखकर फैसले लेने वाला आगे जाएगा। जब जीवन में मौके और विकल्प सामने आएं, तो सुरक्षित रास्ता न चुनें, बल्कि साहस और जोखिम लेकर अलग रास्ते पर चलें। आपको हमेशा जिज्ञासु बने रहना है। अपनी उपलब्धियों पर गुमान के बजाय विनम्रता बनाए रखें। दूर दिखाई देने वाली चुनौतियों से डरना नहीं है।
लूज सेंस ऑफ वंडर, आलवेज कीप दैट हंगर : भाषण के अंत उन्होंने अमेरिकी सिंगर वोमेक ली के गाने को अपने जीवन का मार्गदर्शक बताया। इसे अपनाने की बात कही। उनकी लाइनें थीं - आई हो यू नेवर लूज सेंस ऑफ वंडर, यू गेट योर फिल टू ईट, बट आलवेज कीप दैट हंगर....।