जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि 17 फरवरी की शाम तक जितनी आरतियां गंगा घाटों पर हुई थीं, उनका रिकॉर्ड बनवाया जाए। आगामी एक माह में उनका पंजीकरण कराया जाए। इसके लिए नगर निगम प्रपत्र भी तैयार करे। 31 मार्च तक यह कार्य पूर्ण किया जाए।
31 मार्च के बाद वही व्यक्ति या संस्था घाटों पर आरती कर सकेंगे जिनका नगर निगम ने पंजीकरण किया होगा। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए जो भी संस्था-व्यक्ति घाटों पर आरती को आवेदन करें या नवीनीकरण कराएं उनकी एलआईयू जांच के साथ आवश्यक कार्यवाही करते हुए निर्णय लिया जाए। पंजीकरण के समय घाट पर आरती के स्थान संग व्यक्तियों की संख्या आदि का उल्लेख भी फॉर्म में हो ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था आरती करने के नाम पर घाटों पर अतिक्रमण न करे।