केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सोलर रूफटॉप योजना का बिजली विभाग के नुमाइंदे ही पलीता लगा रहे हैं। कुल लागत की लगभग आधी सब्सिडी और दो से तीन वर्ष में उपभोक्ताओं को बिजली बिल से मुक्ति दिलाने वाले सोलर रूफटॉप सिस्टम को लगवाने के बाद उपभोक्ताओं को बिल के लिए बिजली दफ्तरों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
मीटर रीडर सोलर पैनल वाले उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। उपभोक्ता बिजली कार्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें बिल सुधार के नाम पर अंदाजन एक निश्चित राशि का प्रोविजनल बिल पकड़ा दिया जाता है। उसमें भी बिजली का उपयोग और कितनी बिजली उनके मीटर ने एक्सपोर्ट की, इसका एडजस्टमेंट नहीं हो पा रहा। उपभोक्ता इस बात को लेकर परेशान हैं कि सोलर पैनल लगवाने के समय जो बड़ी-बड़ी बातें कही गईं थीं, उनका लाभ उन्हें कब मिलेगा।
सामान्य मीटर की रीडिंग करते समय मीटर रीडर इस बात का मूल्यांकन करता है कि उपभोक्ता ने कितनी बिजली की खपत की और कितनी अधिकतम डिमांड थी। जबकि सोलर पैनल के नेट मीटर की रीडिंग में खपत और डिमांड के साथ उपभोक्ता ने कितनी बिजली दी यानी कि एक्सपोर्ट हुई, यह रीडिंग भी जुड़ जाती है। मीटर रीडर इतना करने भी नहीं जाते, जबकि उनके मैनुअल में इसका जिक्र है कि उन्हें नेट मीटरों की रीडिंग भी करनी है।
नगरीय विद्युत वितरण मंडल प्रथम के अधीक्षण अभियंता एसके सनौरिया ने कहा कि शुरुआती दौर में सोलर पैनलों की मीटर रीडिंग में थोड़ी समस्या आई थी, लेकिन अब सब कुछ ओके है। साॅफ्टवेयर के इंटीग्रेशन में कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रहीं थीं। मीटर रीडर रीडिंग करने जा रहे हैं।
बिजली के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट का नहीं हो पा रहा एडजस्टमेंट, दे रहे प्रोविजनल बिल
केस- 1
कर्दमेश्वरपुरम कॉलोनी कंदवा निवासी दीपमाला सिंह ने चार किलोवाट का सोलर रूफटॉप का कनेक्शन लिया है। उन्होंने कितनी बिजली खपत की, इसका ब्योरा तो बिल में आ गया, लेकिन उनके मीटर ने कितनी बिजली एक्सपोर्ट की, इसका एडजस्टमेंट नहीं किया गया। इससे वह परेशान हैं।
केस- 2
अंश नगर महावीर कॉलोनी निवासी अरविंद कुमार ने 4 किलोवाट का सोलर रूफटॉप का कनेक्शन लिया है। लेकिन, कनेक्शन लेने के बाद से मीटर रीडर उनके घर नहीं पहुंचा। बिजली कार्यालय की दौड़ लगाई तो वहां से अंदाजन प्रोविजनल बिल बनाकर दे दिया गया।
केस- 3
मीरापुर बसहीं की रहने वाली प्रेमलता सोलर रूफटॉप का कनेक्शन लेकर मीटर रीडर का इंतजार कर रही हैं। उन्हें नहीं पता कि उन्होंने कितनी बिजली खर्च की है और उनके सोलर ने कितनी बिजली बनाई। बिजली खपत और एक्सपोर्ट के एडजस्टमेंट में समस्या आ रही है।