पूर्वांचल में हुई पराजय के कारणों की पड़ताल में कांग्रेस जुट गई है। चुनाव परिणाम को लेकर पार्टी के रणनीतिकार हैरान हैं। कांग्रेस संगठनात्मक स्तर पर ओवरहालिग के मूड में है।
बड़े नेताओं ने जिला से लेकर ब्लाक तक चुनाव में बेहतर प्रदर्शन न करने और पार्टी लाइन के विपरीत काम करने वालों की सूची बनानी शुरू कर दी है। ऐसे लोगों को जल्द ही किनारे कर युवा चेहरों को तरजीह दी जाएगी।
गौरतलब है कि 2012 के चुनाव में कांग्रेस को वाराणसी की पिंडरा, जौनपुर की सदर और मिर्जापुर जिले की मड़िहान सीट से जीत मिली थी लेकिन इस बार के चुनाव में तीनों सीट उसके हाथ से निकल गईं।
मैदागिन स्थित कांग्रेस के जिला कार्यालय में 19 मार्च दिन रविवार को हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। इसमें जिला, महानगर, ब्लाक के पदाधिकारियों के अलावा उम्मीदवार हिस्सा लेंगे। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा कहते हैं कि नतीजे अप्रत्याशित और यकीन के लायक नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान कुछ नेता पार्टी के साथ नहीं लगे थे। ऐसे नेताओं को चिह्नित कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। उन्होंने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।
कांग्रेस का वोट सपा के बजाय भाजपा को गया
समाजवादी पार्टी
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सपा सरकार में वाराणसी से अकेले मंत्री सुरेंद्र पटेल और उनके भाई महेंद्र पटेल अपनी सीट नहीं बचा सके। इन दोनों प्रत्याशियों के लिए निवर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सभाएं भी की थीं।
सेवापुरी और रोहनिया ही नहीं, बल्कि जिले की किसी भी सीट पर सपा प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशियों से नजदीकी मुकाबला नहीं कर सके। पार्टी सूत्रों की मानें सपा जिन चार सीटों पर चुनाव लड़ी, वहां कांग्रेस का वोट सपा उम्मीदवारों को नहीं मिला।
दूसरी ओर शहर क्षेत्र की तीनों सीट पर सपा का वोट कांग्रेस प्रत्याशियों को मिला। कांग्रेस प्रत्याशियों को बढ़ा हुआ वोट इसकी तस्दीक करता है। सपा नेता इस बारे में रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट अखिलेश यादव को सौंपी जाएगी।
सपा-कांग्रेस गठबंधन में सेवापुरी, रोहनिया, अजगरा, और शिवपुर में सपा उम्मीदवार मैदान में थे। शिवपुर सीट से आनंद मोहन गुड्डु यादव को छोड़कर अन्य प्रत्याशियों को पिछले चुनाव की तुलना में कम वोट मिले।
पार्टी नेताओं का कहना है कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने प्रचार भी नहीं किया। नतीजा, कांग्रेस के वोट सपा के बजाए भाजपा की ओर डायवर्ट हो गए। सपा के महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल का कहना है कि हार के कारणों की समीक्षा कर ली गई है।
विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। हार के कारणों की समीक्षा करने के बाद पार्टी गलतियां सुधारेगी।
बूथवार समीक्षा के बाद नए सिरे से पैठ बनाएगी बसपा
बसपा सुप्रीमो मायावती
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विधानसभा चुनाव में बसपा को लेकर बड़े उलटफेर के कयास लगाए जा रहे थे। परिणाम आने के बाद वाराणसी समेत पूर्वांचल में बसपा को बहुत कम सीटें मिली। वाराणसी में 2012 के चुनाव में बसपा को दो सीट मिली थीं। इस बार इन दोनों सीटों पर उसके प्रत्याशी तीसरे स्थान पर चले गए।
अन्य पांच सीटों पर पर भी उसे तीसरे नंबर से ही संतोष करना पड़ा। पिंडरा में जरूर उसे दूसरा स्थान मिला।
अब पार्टी बूथवार समीक्षा में जुट गई है और कमजोर कड़ियों का पता लगाया जा रहा है। मंडल अध्यक्ष भाईचारा कमेटी मेराज फारुखी ने बताया कि जनता ने जो जनादेश दिया है, उसे पार्टी स्वीकार करती है। पार्टी बूथवार समीक्षा के बाद जनता के बीच अपनी उपस्थिति के लिए नए सिरे से प्रयास करेगी।
पिछली बार पूर्वांचल के वाराणसी, आजमगढ़ और मिर्जापुर मंडल की 61 सीट में से आठ सीट मिली थीं। इस बार भाजपा की सुनामी में भी बसपा सात सीट जीतकर अपनी साख बचाने में कामयाब रही।
इस चुनाव में नए वोटरों को आकर्षित करने की बात छोड़िए बसपा अपने परंपरागत वोटरों को नहीं बांध पाई। इसका परिणाम यह रहा कि भाजपा ने उसके परंपरागत वोट बैंक सेंधमारी कर दी।
वहीं अल्पसंख्यक वोटरों को लुभाने के लिए बसपा की रणनीति घातक साबित हुई और अल्पसंख्यक वाटरों ने बसपा को नकार दिया तथा गठबंधन पर भरोसा जताया।