वाराणसी में होने वाले निकाय चुनाव के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते ही कांग्रेस में घमासान शुरू हो गया है। पार्टी में बगावत का शोर थामने के लिए कांग्रेस ने अब अंतिम निर्णय केंद्रीय समिति को सौंप दिया है। वाराणसी नगर निगम, रामनगर पालिका परिषद और गंगापुर नगर पंचायत के सभासद, पार्षद, अध्यक्ष तथा मेयर पद के दावेदारों का पैनल बनाकर प्रदेश कमेटी को सूची भेजी गई है। वहां से यह सूची दिल्ली भेज दी गई है।
बीते सोमवार को 37 वार्डों के उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद मचे हंगामे को देखते हुए कांग्रेस ने एहतियातन यह कदम उठाया है। पहली सूची जारी होते ही 41 कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया। दूसरी ओर पार्टी ने बागहाड़ा वार्ड में सपा से जुड़े दावेदार को टिकट जारी कर दिया। वहीं, स्थानीय चुनाव संचालन समिति में वाराणसी के मेयर व रामनगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद पर किसी एक नाम पर आम सहमति नहीं बन सकी।
नगर निगम के 37 वार्डों के लिए तो स्थानीय चुनाव संचालन समिति ने अपना फैसला सुना दिया है। उसे लेकर पार्टी में हड़कंप मचा है। खास तौर से सपा कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर विरोध के सुर तेज हो गए हैं। यह खबर आलाकमान तक पहुंच गई है। इस बीच शेष 53 वार्डों के प्रत्याशियों के मामले में भी आम राय न बन पाना भी पार्टी के लिए बड़ी चिंता का विषय है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अब चुनाव संचालन समिति की भूमिका पर ही सवाल उठाने लगे हैं।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा का कहना है कि दो दिन पहले सभी दावेदारों की सूची प्रदेश कमेटी को भेज दी गई थी। वहां से इसे दिल्ली भेजा गया है और वहीं से अंतिम सूची फाइनल होगी। उधर, कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि लखनऊ और दिल्ली के बहाने स्थानीय चुनाव संचालन समिति खुद को बचाने का प्रयास कर रही है।