मिलता है गलत इलाज : विशेषज्ञों ने बताया कि ये ऐसे दौरे होते हैं जो देखने में एपिलेप्सी की तरह से लगते हैं लेकिन इनमें मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि नहीं होती। ये मुख्य तौर पर मनोवैज्ञानिक कारणों से आते हैं। इसकी सही जांच देर से हो पाती है। इससे मरीजों को लंबे समय तक गलत इलाज मिल सकता है। इसका इलाज वीडियो ईईजी जांच से शुरू किया जाता है।
हर एक लाख में तीन से 33 मरीज : एपिलेप्सी सर्जरी के करीब 20 से 30 फीसदी मामले पीएनईएस के होते हैं। अनुमानित दर 1.5 से 3 प्रति लाख प्रति वर्ष है, जबकि सामान्य आबादी में दो से 33 प्रति लाख तक हो सकती है। इसके सबसे ज्यादा मामले महिलाओं में आते हैं। इनकी शुरुआत अक्सर युवावस्था में होती है। कई मामलों में एपिलेप्सी और पीएनईएस दोनों साथ-साथ भी मौजूद हो सकते हैं। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी इसका इलाज बताया गया।
सीजर्स की कई वजहें : एपिलेप्सी, सिर में गंभीर चोट, मस्तिष्क संक्रमण, स्ट्रोक, आनुवंशिक कारण, मेटाबॉलिक असंतुलन (जैसे हाइपोग्लाइसीमिया, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन), ब्रेन ट्यूमर, दवाओं का अचानक बंद होना या नशे का प्रभाव।