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UP: गोरखपुर से शंकराचार्य के गो रक्षा यात्रा का शंखनाद, 81 दिन बाद लखनऊ में समापन; 403 विधानसभाओं में जाएंगे

Thu, 16 Apr 2026 06:08 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: उत्तर प्रदेश में आगामी तीन मई से 24 जुलाई तक रक्षा यात्रा निकाली जाएगी। 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर यह यात्रा गुजरेगी। इसके साथ ही हर गांव और मोहल्लों में पांच-पांच गो वीरों को नियुक्त किया जाएगा। 
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गोरखपुर से शंकराचार्य के गो रक्षा यात्रा का शंखनाद। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Varanasi News: गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और सनातन धर्म के संरक्षण के उद्देश्य से ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गो-रक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा’ पर निकलेंगे। यह यात्रा तीन मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर से प्रारंभ होगी और उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। यात्रा का समापन 24 जुलाई को लखनऊ में होगा।

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यात्रा का नेतृत्व शंकराचार्य के साथ गो-गंगा प्रेमी गोपाल मणि करेंगे। यह यात्रा ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया से शुरू होकर आषाढ़ शुक्ल दशमी तक यानी 3 मई से 24 जुलाई तक निरंतर चलेगी।

यात्रा के संयोजक दंडी संन्यासी स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरि और मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि इस दौरान प्रदेशभर में विभिन्न स्थानों पर सभाएं आयोजित की जाएंगी। इन सभाओं के माध्यम से लोगों को गोरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा और गोमाता के संरक्षण के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाया जाएगा।

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गो रक्षा यात्रा की तैयारियां तेज

गविष्ठि यात्रा के प्रमुख संकल्पों में गोमाता को ‘राज्यमाता’ और ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाना, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक गोधाम की स्थापना, हिंदू समाज को ‘गोमतदाता’ बनने के लिए प्रेरित करना, हर गांव और मोहल्ले में पांच-पांच ‘गो वीरों’ की नियुक्ति कर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना शामिल है। इसके अलावा विधानसभा स्तर पर संचालित गोशालाओं और बूचड़खानों का आकलन कर उनकी स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, यह यात्रा पूर्वांचल से शुरू होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए लखनऊ पहुंचेगी। 24 जुलाई को लखनऊ स्थित कांशीराम सांस्कृतिक स्थल (स्मृति उपवन) में भव्य सभा के साथ इसका समापन होगा, जिसमें प्रदेशभर से लाखों गो-भक्तों के शामिल होने की संभावना है।

आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण का अभियान भी है, जिसका उद्देश्य गोरक्षा के प्रति जनभावना को मजबूत करना और इसे एक व्यापक जनआंदोलन का रूप देना है।
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