उत्तर प्रदेश सरकार का जनसुनवाई पोर्टल मजाक बन कर रह गया है, क्योंकि पोर्टल पर तो मामलों का निस्तारण दिखाकर अधिकारी शासन से अपनी पीठ थपथपा लेते हैं, लेकिन पीड़ित की समस्या जस की तस रहती है।
चाहे जमीन के पट्टे या रास्ते पर अवैध कब्जे का मामला हो अथवा आवासों के आवंटन फर्जीवाड़े की शिकायत हो, सभी का हाल एक जैसा है। ऐसे मामलों में शिकायत दर शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
जौनपुर में तो एक व्यक्ति ने पीएम आवास, शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना समेत अन्य विकास योजनाओं में धांधली की शिकायत का निस्तारण तो नहीं हुआ तो उसने अब राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।
जिले के बदलापुर विकास खंड के भूला गांव निवासी सर्वेश मिश्र ने जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत की है कि भूला ग्राम पंचायत में 2011 से 2018 तक ग्राम पंचायत में जितने भी विकास कार्य हुए हैं उसकी जांच के लिए हलफनामे के साथ शिकायत उच्च अधिकारियों से की थी।
जिला गन्ना अधिकारी जौनपुर को जांच अधिकारी नामित किया गया, लेकिन आज तक विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से गांव में कोई जांच नहीं की गई। वह शिकायत पर शिकायत करते रहे लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। अब प्रधान द्वारा जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
अब न्याय की उम्मीद छोड़ चुके सर्वेश ने राष्ट्रपति वह पीएम को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। उन्होंने कहा है कि विकास कार्यों में घपला करने वाले लोग अब उन्हें मार देंगे। उनके हाथों मरने से अच्छा है कि खुद से मौत को गले लगा लें।
पट्टे की जमीन मिली नहीं, मामला निपट गया
जनसुनवाई पोर्टल
चदौली के नौगढ़ के अशोक कुमार ने जुलाई 2018 को मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर बताया था कि तहसील नौगढ़ के ग्राम बैरगढ़ में तत्कालीन डीएम हेमंत कुमार ने 44 लोगों को 10 बिस्वा के हिसाब से पट्टा जारी किया था।
इस पर उप जिलाधिकारी नौगढ़ ने कब्जा नहीं दिलाया। 15 जुलाई को जिलाधिकारी ने राजस्व एवं आपदा विभाग को कब्जा दिलाने का निर्देश दिया। इसके बाद 18 जुलाई को तहसीलदार मौके पर गए और उन्होंने 31 जुलाई को सीएम पोर्टल पर रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इसमें लिखा है कि आराजी नंबर 419 रकबा 18 हेक्टेयर राजस्व अभिलेख में बंजर के नाम से दर्ज है। आवंटन के बाद इस भूमि का रकबा 13 हेक्टेयर बचा है। पांच हेक्टेयर भूमि 44 लोगों को आवंटित किया गया है।
बाद में तहसीलदार ने पोर्टल पर इस रकबे पर वन विभाग के द्वारा अनाधिकृत रूप से पौधा लगाने और वन विभाग की ओर से भूमि को धारा 20 के अंतर्गत चिह्नित करना बता दिया। पौधा लगने के कारण कब्जा किया जाना संभव नहीं है। यह दिखाते हुए तहसीलदार ने पोर्टल पर रिपोर्ट लगा दी कि इस मामले को निस्तारित किया जाता है।
सीएम के विशेष सचिव के आदेश पर भी कार्रवाई नहीं
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आजमगढ़ के तहबरपुर ब्लाक के गांव मेहमौनी में विकास कार्यों और प्रधानमंत्री आवास आवंटन में फर्जीवाड़े की शिकायत सुशील कुमार राय ने डीएम से की थी। डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच की।
इसमें विकास कार्यों में 17 लाख के गबन और सैकड़ों प्रधानमंत्री आवासों में फर्जीवाड़े की बात सामने आई। फिर आरोपी प्रधान मांडवी राय को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। नोटिस का जवाब मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से शिकायत की।
इसके बाद सीएम के विशेष सचिव मृत्युंजय कुमार नारायण ने 24 अगस्त को डीएम को कार्रवाई कर अवगत कराने के निर्देश दिए। इस पर डीपीआरओ आनंद प्रकाश ने रिपोर्ट दे दी कि कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जवाब मिल गया है, कार्रवाई की जा रही है।
फिर शासन से रिपोर्ट लौटा कर कहा गया कि कार्रवाई कर अवगत कराएं। 25 दिन बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर सीएम के विशेष सचिव ने डीएम को पत्र भेजकर कार्रवाई करके सीएम को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।