कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ऐसी आपत्तिजनक व भड़काऊ पोस्ट साझा की गईं, जिनसे प्रधानमंत्री, केंद्र सरकार व संवैधानिक संस्थाओं की छवि धूमिल करने का प्रयास हुआ। इस प्रकार के आचरण से सामाजिक तनाव, वैमनस्य और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई।
अधिवक्ता शशांक शेखर के मुताबिक प्रधानमंत्री और संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह के लगातार अपमान, निराधार आरोप और भड़काऊ प्रचार केवल लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश हैं। न्यायालय ने हमारे परिवाद को स्वीकार कर कार्यवाही शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया है।