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मुआवजा मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष

Tue, 31 May 2016 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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रिंग रोड के लिए अधिग्रहीत जमीन के पूरे मुआवजे को लेकर सत्याग्रह जारी है। सोमवार को भी निर्माणाधीन रोड पर किसान डंटे रहे और अपनी मांगों के समर्थन में बीच-बीच में नारे लगाते रहे। हृदयपुर, इदिलपुर और अहमदपुर में सत्याग्रह चल रहा है।
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किसानों का कहना है कि उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया पर अभी तक पूरा मुआवजा नही दिया गया। उनकेघर गिरा दिए गए, पेड़ और पंपीसेट उखाड़ दिए गए। किसानों का कहना है कि कई किसानों के घर में खाने के लाले पड़ गए हैं। बावजूद इसके शासन, प्रशासन कान में तेल डाले बैठा है। किसानों ने जोर देकर कहा कि जब तक उनकी मांग मान नहीं ली जाती वह संघर्ष करते रहेंगे। हृदयपुर में चल रहे सत्याग्रह में रामबली सिंह, हीरालाल मौर्या, हरिनाथ पटेल, अरुण कुमार, गोपाल, बुझारत पटेल,सामा देवी, रज्जो देवी, शांति देवी, प्रभावती देवी, शकुंतला देवी आदि मौजूद रही। किसानों की मांग है कि उन्हें नए अधिग्रहण कानून के अंतर्गत नए सर्किल रेट से उनकी जमीन  का मुआवजा मिले।


रिंग रोड के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे किसानों के साथ जुड़ने के लिए सियासी पार्टियों में जहां होड़ मच गई है, वहीं किसानों ने आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं करने की ठान ली है। किसानों ने नेताओं को साफ बता दिया है कि किसानों के इस मंच के जरिए होने वाली पंचायत, रैलियों और सत्याग्रह जैसे कार्यक्रमों में केवल उनकी मांगों और उनके आंदोलन की ही बात होगी। दो महीने से भी ज्यादा समय से नए सर्किल रेट पर मुआवजे के लिए आंदोलित किसानों की आधा दर्जन से ज्यादा महापंचायतें हो चुकी हैं। इनमें हजारों किसान जुट रहे हैं।
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महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं ज्यादा है। यही कारण है कि सियासी दलों के कुछ नेता तो किसानों के हक के लिए तो कई नेता अगले विधानसभा चुनाव के लिहाज से अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। भाजपा और सपा नेताओं में जोर-आजमाइश कुछ ज्यादा है। रविवार को हुई पंचायत में भी कुछ ऐसा ही हुआ।
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