नियमों को ताक पर रखकर विश्वनाथ मंदिर में नि:शुल्क शास्त्रियों की हुई नियुक्तियों की जांच के निर्देश मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने सोमवार की दोपहर जारी कर दिए। जांच मुख्य विकास अधिकारी विशाख जी को सौंपी गई है। इससे पहले सीओ ज्ञानवापी और खुफिया विभाग के इंस्पेक्टर इन शास्त्रियों को लेकर मंडलायुक्त आवास पहुंचे, जहां उनसे घंटों पूछताछ की गई। 11 शास्त्रियों के बयान दर्ज किए गए, जबकि एक का पता नहीं चला।
विश्वनाथ मंदिर में नि:शुल्क शास्त्रियों की अब तक की तैनाती से संबंधित पत्रावलियां भी तलब कर ली गई हैं। इससे संबंधित रिकार्डों की जांच की जाएगी। बिना प्रक्रिया पूरी कराए 12 नि:शुल्क शास्त्रियों की मंदिर में तैनाती का खुलासा होने के बाद मंडलायुक्त ने सुबह ही संबंधितों को पूछताछ के लिए अपने आवास पर बुलवा लिया। मंदिर प्रशासन को जब इसकी जानकारी हुई तब कुछ कर्मचारियों के माथे पर बल पड़ गए। मंडलायुक्त के सामने पेशी से पहले नि:शुल्क शास्त्रियों को समझाया भी गया कि वहां जाकर कहना क्या है। निर्देश के
अनुपालन में एलआईयू के इंस्पेक्टर एके सिंह 11 नि:शुल्क शास्त्रियों राकेश पाराशर, तीरथराज शास्त्री, सुनील शास्त्री, सौरभ शास्त्री, भृगुनाथ शास्त्री, अजय शास्त्री, रोहित शास्त्री, संतोष शास्त्री, मोरध्वज, विजय तिवारी और भावेश झा को लेकर मंडलायुक्त के आवास पहुंचे। वहां सभी से उनकी तैनाती से जुड़े सवाल किए गए। जांच अधिकारी सीडीओ विशाख जी ने बयान दर्ज किए। किसी ने एक महामंडलेश्वर की पैरवी का हवाला दिया तो किसी ने बसपा काल में रहे एक मंत्री का। एलआईयू ने भी अपनी रिपोर्ट इन नि:शुल्क शास्त्रियों के बारे में सौंपी। मंडलायुक्त को बताया गया कि डेढ़ महीने पहले इनके पास जारी किए गए थे। फिलहाल
बयान लेकर सभी को कमिश्नर आवास से लौटा दिया गया। उल्लेखनीय है वर्ष 2009 में 11 नि:शुल्क शास्त्रियों की नियुक्ति निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत कराई गई थी। उनका अनुमोदन न्यास परिषद से भी कराया गया था। छह साल पहले न्यास से चयनित शास्त्रियों में रजनीकांत वाजपेयी, अनिल कुमार तिवारी, अमरनाथ उपाध्याय, विकास कुमार चौबे, ऋषि नंदन मिश्रा, अंबरीश मिश्रा, सतीश कुमार द्विवेदी, शिवजी मिश्र, राम प्रताप शुक्ल, मनीष कुमार तिवारी, गणेश दत्त शर्मा के नाम शामिल हैं।