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रामानंदी संप्रदाय के विरुद्ध टिप्पणी स्वीकार्य नहीं, मर्यादा में रहे शंकराचार्य : जगद्गुरु बालक देवाचार्य

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वाराणसी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा रामानंदी संप्रदाय पर की गई टिप्पणी के बाद रामानंदी संप्रदाय के संतो ने नाराजगी जताई। सभी संतों ने नरहरिपुरा के पातालपुरी मठ में बैठक कर शंकराचार्य को मर्यादा में रहने की सीख दी। जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने कहा कि शंकराचार्य स्वयं को धर्मसम्राट न समझें। जिन्होंने उन पर लाठियां बरसाई, वही लोग आज हिन्दुओं को बांटने की साजिश में लिप्त हैं। संतों को राजनीतिक दलों के एजेंट नहीं बनना चाहिए। दूसरों को नीचा दिखाने के बजाय अपने को श्रेष्ठ समझना चाहिए।
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बालक देवाचार्य ने आगे कहा कि रामानंदी संप्रदाय ने रामभक्ति के माध्यम से भारत की संस्कृति और हिंदुत्व को अक्षुण्ण रखा। जो स्वयं को शंकराचार्य कह रहे हैं, उन्हें राजनीति की तरह बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने गऊ माता की सेवा और धर्म रक्षा का उदाहरण देकर चेतावनी दी कि मर्यादा का उल्लंघन संतों और देशवासियों के लिए अस्वीकार्य है।
महंत रामलोचन दास ने कहा कि राम और रामानंदी संप्रदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं होनी चाहिए, अन्यथा संतो का सम्मान घटेगा और हिंदू धर्म को बांटने वालों को बोलने का मौका मिलेगा। महंत श्रवण दास ने स्पष्ट कहा कि रामानंदी संप्रदाय के खिलाफ एक शब्द भी स्वीकार्य नहीं है। महंत अवध बिहारी दास, महंत शिवकुमार दास, महंत अवध किशोर दास समेत अन्य संतों ने रामानंदी संप्रदाय की सेवा और हिंदू धर्म की रक्षा के योगदान की चर्चा की। बैठक में महंत धनुषधारी दास, महंत लाल बाबा, महंत राघव दास, महंत राम दास, महंत कौशल किशोर दास, महंत श्रीभगवान, महंत शुखदेव दास, मोहन दास कोतवाल, विजय रामदास कोतवाल, संत जयराम दास, संत रामदास, संत सर्वेश दास, संत मुक्ति दास आदि उपस्थित रहे।
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