वाराणसी। अस्सी घाट का किनारा और सुबह-ए-बनारस का मंच। स्वरलहरियों की अजस्त्र सुरधारा...। ठुमरी सम्राट पं. महादेव प्रसाद मिश्र की स्मृति में आयोजित संगीत समारोह में कथक और ठुमरी की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को नवीनता का अहसास कराया। सोमा घोष के सुरों ने ऐसा जादू जगाया कि श्रोताओं की पंक्ति में बैठे प्रो. राजेश्वर आचार्य भी सुर से सुर मिलाने लगे। कुछ ऐसा माहौल बना कि हर किसी ने बनारस के इस रस को अंतस में उतार लिया। बुधवार की शाम हल्के कोहरे और ठंड के बीच कलाकारों ने मंच संभाला। डॉ. सोमा घोष ने भगवान शिव और मां गंगा को नमन करते हुए गंगा तरंग रमणीय जटा कलापं...से शुरुआत की। मंच पर उनके साथ पं. महादेव मिश्र के पुत्र पं. गणेश प्रसाद मिश्र भी विराजमान हुए। भगवान शिव को नमन करने के बाद डॉ. सोमा ने प्रतीक्षारत प्रेयस की ठुमरी पिया के आवन की आस लगी मोहे... की तान जब छेड़ी तो पं. गणेश मिश्र ने अपने पिताजी के अंदाज में सुर से सुर मिलाए। मंच के सामने बैठे श्रोताओं ने भी स्मृतिशेष को नमन किया।
सुरों के रस के प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए सोमा घोष व गणेश मिश्र ने राग मिश्र देश में ठुमरी मेरे राम उतरेंगे पार नदिया धीरे बहो ना... सुनाकर माहौल को राममय कर दिया। इसके बाद अगली ठुमरी कजरी अखियां भई घटा बरसाती... सुनाया। इसके बाद बारी थी पं. महादेव मिश्र के प्रसिद्ध दादरा मानूंगी ना मानूंगी उनके मनाए बिना... और हमरी अटरिया पर आओ संवरिया, देखा देखी तनी हो जाए राम... पेश किया। दादरा की सुमधुर प्रस्तुति सुनने के बाद पं. राजेश्वर आचार्य भी खुद को रोक ना सके। वह भी मंच तक पहुंच गए और उन्होंने सोमा घोष के साथ एंहि ठइयां मोतिया हेराय गइले रामा...सहित कई प्रस्तुतियां दीं। इसके पूर्व विशाल कृष्ण ने कथक के माध्यम से पं. महादेव प्रसाद की स्मृति को नमन किया।
आत्माभिव्यक्ति के पथिक थे पं. महादेव मिश्र
ठुमरी सम्राट पंडित महादेव प्रसाद मिश्र की श्रद्धा स्मृति में पं. महादेव प्रसाद मिश्र संगीत संस्थान की ओर संस्कार भारती और सुबह ए बनारस के सहयोग से कार्यक्रम हुआ। शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्यमंत्री रविन्द्र जायसवाल, विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर व प्रो. राजेश्वर आचार्य ने किया। प्रो. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि पं. महादेव मिश्र जी आत्माभिव्यक्ति के पथिक थे। आत्म विज्ञापन के मुक्त संगीतज्ञ थे महादेव जी। स्वागत पं. गणेश प्रसाद मिश्र और संचालन अंकिता खत्री ने किया।