सुगम यातायात के लिए होना यह चाहिए कि सड़कों, लिंक मार्गों, गलियों में जहां कहीं भी अतिक्रमण हो या किसी दूसरे तरह से अवरोध उत्पन्न हो रहा हो तो उसे हटाकर यातायात व्यवस्थित कराया जाए लेकिन यहां ठीक इसके विपरीत हो रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों से लगायत कॉलोनी की सड़कों तक जन सुविधा के नाम पर पार्किंग ठेके का खेल खेलने में नगर निगम के अफसरों और ठेकेदारों के सिंडिकेट ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब चाहे घंटों जाम लगे, बेतरतीब पार्किंग से दुर्घटना हो, किसी को कोई परवाह नहीं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पार्किंग से यातायात व्यवस्थित होने के बजाय और अव्यवस्थित हो गया तो फिर उसे बनाए रखने का औचित्य क्या है लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं।
नगर निगम की मनमानी का हाल यह है कि शहर में फुटपाथ हो या कॉलोनी की गलियां, या फिर सड़कें, जहां जगह मिली, वहीं पार्किंग स्थल बना दिया। शाकंभरी कांपलेक्स के पास नगर निगम का पार्किंग स्थल इसका उदाहरण है। लंका-कैैट मार्ग से सटे इस कांपलेक्स के सामने रवींद्रपुरी कॉलोनी मार्ग है। इसी सड़क पर नगर निगम ने पार्किंग का ठेका दे दिया है। इसके चलते आए दिन जाम लगने के साथ ही यहां हालात ऐसे होते हैं कि आप पैदल भी आसानी से नहीं निकल सकते।
कांपलेक्स के अंडर ग्राउंड में दूकानें खुली हैं। जबकि, लोग सड़क पर वाहन खड़ा करते हैं। वीडीए की अनदेखी और नगर निगम की उदासीनता केचलते पहले तो मल्टीस्टोरी बनाने की अनुमति बिना अंडरग्राउंड पार्किंग के दे दी। उसके बाद जो सड़क पर जगह बची उस पर पार्किंग खोल दिया। नतीजतन जाम से जूझते लोगों के लिए हर दिन मुसीबत खड़ी हो रही है। ठेकेदार के कारिंदे वसूली को लेकर वाहन चालकों से किचकिच भी करते हैं। यदि कोई दूर वाहन खड़ा करता है तो उससे भी नगर निगम का पार्किंग स्थल दिखाकर शुल्क वसूलने को लेकर किचकिच होती है। पार्किंग स्थल की एरिया भी तय नहीं है। खुलेआम मनमानी के बावजूद नगर निगम के अफसरों की आंखें नहीं खुल रहीं।