गर्मी में 60 फीसदी बढ़ जाती है मांग
कमच्छा क्षेत्र के सीड्स कारोबारी मोहन प्रसाद बताया कि गर्मी और उमस के समय में कॉकरोच, दीमक और कीट मारने वाले पेस्ट कंट्रोल की मांग 60 फीसदी बढ़ जाती है। पहले लोग साल में एक या दो बार ही कीटनाशक का इस्तेमाल करते थे। अब साल में तीन से चार बार खरीदते थे। अमरा के कारोबारी ओमप्रकाश पासवान ने बताया कि कीटनाशक का सालाना कारोबार ही 80-90 करोड़ का है।
त्वचा के लिए खतरनाक कॉकरोच, हो सकती है एलर्जी
मंडलीय अस्पताल के स्किन रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकुंद श्रीवास्तव ने बताया कि कॉकरोच गंदगी में ही पनपते हैं। गर्मी और उमस के मौसम में इनसे होने वाली स्किन एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ते हैं। कॉकरोच की लार, उनके मल और उनके शरीर से झड़ने वाले बारीक कणों में एक विशेष प्रकार का प्रोटीन जब संवेदनशील त्वचा के संपर्क में आता है, तो त्वचा पर लाल चकत्ते, तेज खुजली और सूजन की समस्या हो सकती है।
जैविक विधि से कॉकरोच मारे जा रहे हैं। दुकानों पर बवेरिया बैसियाना नाम के जैविक कीटनाशक की बिक्री सबसे अधिक होती है। यह सरकार के कृषि विभाग से अनुदानित भी है। ये कॉकरोच की त्वचा में जाकर नष्ट करते हैं। पूरी तरह सुरक्षित है। - बृजेश विश्वकर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।
आसपास गंदगी के माहौल के कारण कॉकरोच और दीमक पनपने लगते हैं। कपड़े को बचाने के लिए साल में तीन- चार बार पेस्ट कंट्रोल कराना पड़ता है। हर साल करीब 25 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। - एकता अग्रवाल, साड़ी कारोबारी, भैरवनाथ
कूड़ा घर के कारण कॉकरोच, दीमक और चूहे का आतंक हैं। हर तीसरे महीने 5 हजार का पेस्ट कंट्रोल कराया जाता है। - प्रतीक गुप्ता, किराना कारोबारी
कॉकरोच से खाने पीने के सामान को बचाना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए सालाना दो से तीन बार पेस्ट कंट्रोल कराना पड़ता है। खर्च भी काफी बढ़ जाता है। - मोनिका गुप्ता, कैफे संचालक
रात होते ही किचन में कई जगहों पर इनके झुंड दिखाई पड़ते हैं। कीटनाशक का प्रयोग कर इन्हें भगाया जाता है। हर महीने इसी में 500 रुपये तक खर्च हो जाते हैं। फिर भी समस्या खत्म नहीं होती है। - मोनिका गुजराती, गृहिणी, चौखंभा