चौबेपुर के श्रीकंठपुर निवासी बसपा नेता रामबिहारी चौबे की हत्या का खुलासा बिना किसी ठोस सबूत के आधार पर मनमाने तरीके से किया गया है। मामले में अजय मरदह और दो अन्य को झूठे तरीके से फंसाया गया है।
सैयदराजा के भाजपा विधायक सुशील सिंह ने गुरुवार को कैंटोनमेंट स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता में यह बातें कहीं। विधायक ने कहा कि इस खुलासे की जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई है। सीएम ने आश्वस्त किया है कि जांच कराकर रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जाएगी।
विधायक सुशील ने आरोप लगाया कि मुख्तार अंसारी, विनीत सिंह और अजय राय ने साजिश रचकर यह खुलासा कराया। उन तीनों के इशारे पर ही एसटीएफ के एक इंस्पेक्टर और चौबेपुर थानाध्यक्ष ने मनमाने तरीके से उन्हें बदनाम करने के लिए चौबे हत्याकांड का खुलासा किया।
कहा कि भाजपा सरकार में पुलिस फर्जी खुलासे नहीं कर पाएगी। यह भी कहा कि जल्द ही एसटीएफ इंस्पेक्टर की कॉल डिटेल प्रस्तुत कर मामले से जुड़ा खुलासा किया जाएगा। कहा कि रामबिहारी चौबे के बेटे अमरनाथ चौबे को मुख्तार, विनीत और अजय राय ने मोहरा बना लिया है।
इसकी भी आशंका जताई कि विरोधी आने वाले दिनों में अमरनाथ चौबे को निशाना बनाकर उसका भी आरोप उनके सिर मढ़ सकते हैं। इस बारे में उन्होेंने आईजी जोन, डीआईजी रेंज और एसएसपी को अवगत कराते हुए अमरनाथ और उनके पूरे परिवार की सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
विधायक सुशील ने कहा कि रामबिहारी और उनके बेटे अमरनाथ में अच्छे संबंध नहीं थे। रामबिहारी की हत्या के 20 दिन पहले बाप-बेटे में विवाद भी हुआ था। यह भी आरोप लगाया कि अमरनाथ पहले से ही मुख्तार, बजरंगी और सुभाष ठाकुर के संपर्क में रहे।
इसलिए हत्या के बाद उन्होंने नामजद मुकदमा नहीं दर्ज कराया और जब एमएलसी बृजेश सिंह ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने के लिए प्रार्थना पत्र देने की बात कही तो उससे भी पीछे हट गए।