मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी की मेहमाननवाजी को दुनियाभर में पहचान दिलाना चाहते हैं। वाराणसी दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन में शामिल होने वाले अप्रवासियों को पारिवारिक माहौल में ठहराने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे लोगों को तैयार किया जाए, जो तीन दिनों तक अप्रवासियों को अपने घरों में ठहराएं। ताकि जब यहां से अप्रवासी वापस जाए तो दुनियाभर में काशी की स्वागत और सत्कार की चर्चा करें।
सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन की तैयारियों की जानकारी ली और इस दौरान उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि क्या ऐसा संभव है कि अप्रवासियों को स्विस काटेज और होटल के अलावा घरों में ठहराया जा सकता है।
अधिकारियों की सहमति के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि अप्रवासी भारतीय सम्मेलन को लेकर दुनियाभर में काशी का संदेश भी पहुंचाना है। ऐसे परिवारों को चिन्हित किया जाए जो स्वेच्छा से अप्रवासियों को अपने घरों में ठहराये। इसके अलावा जनवरी में होने वाले सम्मेलन से पहले शहर में वॉल पेंटिंग और फसाड लाइट लगाने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा, नौ अगस्त को वे फिर काशी आएंगे, तब तक इस दिशा में संभावना तलाशी जाए। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि प्रशासन की ओर से अपील जारी की जाएगी कि अप्रवासियों को अपने घरों में ठहराने वाले लोग आगे आएं। इससे काशी की अपनेपन और सौहार्द की पहचान पूरी दुनिया में बनेगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस दिशा में प्रयास तेज किया जाएगा।
सीएम ने बदला कार्यक्रम
वाराणसी दौरे पर आए मुख्यमंत्री मंगला आरती के बाद बाबा विश्वनाथ करने वाले थे। मगर, वीआईपी समय निर्धारित होने और सोमवार पर शिवभक्तों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए उन्होंने आखिरी समय में अपने कार्यक्रम में बदलाव किया और देर रात ही काशी विश्वनाथ का दर्शन कर लखनऊ रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने सुरक्षा घेरा तोड़कर शिवभक्तों से बातचीत की।