श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा पाथवे योजना को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए और इसके साथ सभी को विश्वास में लेकर कार्य पूरा कराया जाए। कारिडोर योजना के कार्य में किसी भी तरह की कमी ना हो और कोई लापरवाही न बरती जाए। उक्त दिशा निर्देश शनिवार को सीएम ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी को दिए।
विश्वनाथ कारिडोर योजना के प्रस्तुतीकरण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम की मंशा के अनुरूप सोमनाथ मंदिर के तर्ज पर ही मंदिर क्षेत्र के विकास का खाका खींचा जाए। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण की रूपरेखा सीएम के सामने रखी गई।
पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से विश्वनाथ कारिडोर योजना की पूरी जानकारी दी गई। सीएम ने निर्देश दिया है कि योजना की डीपीआर बनने के पहले जनता से इस मामले पर खुली चर्चा हो। विकास कार्यों के दौरान किसी को भी कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
22 और 23 अप्रैल को योजना का ब्ल्यू प्रिंट जनता के सामने रखा जाएगा। वहीं, कॉरिडोर के लिए मंदिर परिक्षेत्र में क्रय किए गए भवनों का ध्वस्तीकरण लगातार जारी है। कॉरिडोर के लिए सर्वेक्षण में 166 भवन चिह्नित किए गए हैं। मंदिर प्रशासन ने इनमें से अब तक 71 से अधिक भवन खरीद लिए हैं।
दावा किया जा रहा है कि कई भवनों के स्वामियों से इस बारे में बातचीत अंतिम चरण में है। गौरतलब है कि कॉरिडोर के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने बजट में 650 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। पहली किस्त के रूप में 40 करोड़ रुपये स्वीकृत भी हो चुके हैं।
130 मीटर लंबा होगा कॉरिडोर
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
चौक से लगी सड़क से छत्ताद्वार होते हुए बाबा के गर्भगृह को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर की लंबाई 130 मीटर होगी। 16 फीट से अधिक चौड़े इस कॉरिडोर में मंदिर परिसर में लगे नक्काशीदार पायों के अलावा दीवारें भी देवी-देवताओं से चित्रित होंगी।
कॉरिडोर के दोनों तरफ देव प्रतिमाओं के विग्रह स्थापित किए जाएंगे। कॉरिडोर में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की ऋचाओं के अलावा वेदांत, वेदांग, उपनिषद और 18 पुराणों के मंत्र भी गूंजते रहेंगे।
भक्तों के लिए बाबा विश्वनाथ तीर्थ हॉल, दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं के एक साथ खड़े होने की सुविधा, कॉरिडोर में आरती, पूजा के टिकट काउंटर तथा पेयजल के अलावा प्रसाद वितरण काउंटर भी होगा।