वाराणसी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी
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सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से हम सभी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना साकार होते देख रहे हैं। इसका साकार रूप सौराष्ट्र में भगवान सोमनाथ महादेव के भव्य मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा, सुंदरीकरण व अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से दिख रहा है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम, महाकाल में महालोक की स्थापना, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण समेत सनातन परंपरा से जुड़े अनेक पवित्र तीर्थ स्थल अपने वैभव के साथ विकास की नई यात्रा तय कर रहे हैं। सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी प्रेरक शक्ति बताया।
वहां मौजूद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय का इतिहास नहीं है। यह इतिहास पुनर्जन्म का है। यह इतिहास उस अदम्य संकल्प का है, जिसमें हर विध्वंस के बाद एक नया निर्माण खड़ा हुआ। आततायी आते रहे, समय के अंधकार में विलीन होते रहे। लेकिन, सोमनाथ हर युग में पुनः उसी तेज, उसी श्रद्धा और उसी गौरव के साथ खड़ा होता रहा।
सोमनाथ मानो स्वयं यह उद्घोष करता है, तलवारें सभ्यताओं को घायल कर सकती हैं, लेकिन संस्कृति की आत्मा को समाप्त नहीं कर सकतीं। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कथक कलाकार अंकिता भट्टाचार्या ने अपनी टीम के साथ शिव तांडव और डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने भगवान सोमनाथ की स्तुति की। बनारस घराने के अंशुमान महाराज ने सरोद वादन की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा, महापौर अशोक तिवारी, विधायक त्रिभुवन राम, अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, सुनील पटेल, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, डॉ. राम नारायण द्विवेदी आदि मौजूद रहे। विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया।
काशी और सोमनाथ भारत की सभ्यागत चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ
काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की जड़ों से जुड़ने का अभिनव प्रयास है। काशी और सोमनाथ भारत की सभ्यागत चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ हैं। उत्तर में मां गंगा के पवित्र तट पर बाबा विश्वनाथ धाम और पश्चिम में सागर तट पर प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ महादेव हैं। गंगा तट पर काशी ने जहां सनातन की आध्यात्मिक धारा को अक्षुण्ण रखा है तो सोमनाथ ने हमारे स्वाभिमान व पुनर्जागरण की लौ को प्रज्ज्वलित रखा है।