मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशीवासियों के दर्द को समझा और कहा कि पेयजल संकट को केंद्र सरकार की मदद से दूर करेगी। काशी में ओवरहेड तो बने हैं लेकिन उनसे पानी की आपूर्ति नहीं होती है। काशी में पहले केंद्र सरकार की योजनाओं में कई अवरोध थे जिसे समाप्त कर विकास की गति को बढ़ाई जा रही है।
अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में पेयजल संकट को ‘योगी जी, काशी है प्यासी’ शीर्षक से खबर का प्रकाशित किया था। शुक्रवार को सर्किट हाउस पहुंचे सीएम से हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के कुछ पदाधिकारियों ने काशी में पेयजल संकट के बारे में उनका ध्यान आकृष्ट कराया।
जिसका जिक्र खुद सीएम ने कटिंग मेमोरियल इंटर कालेज में आयोजित केंद्र सरकार की उपलब्धियों के तीन साल बेमिसाल जन समागम में किया।
सीएम ने कहा कि काशी को बड़ा सौभाग्य प्राप्त है।
काशी की जनता ने यशस्वी प्रधानमंत्री को चुना है इसके लिए यहां की जनता अभिनंदन करता हूं। आजादी के बाद स्वतंत्र भारत में 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद पीएम ने प्राथमिकताएं तय की। गांव, गरीब, बेरोजगार, माताओं को समर्पित होकर सरकार काम करेगी। जनधन से लेकर उज्जवला योजना तक पहुंचाई गई।
काशी में शोधार्थियों को नया मार्ग मिलता है। काशी में आदि शंकराचार्य, संत रामानंद, संत रविदास, संत कबीर दास के बाद आधुनिक भारत में महामना मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना का शिक्षा को नया मार्ग दिया है। आज काशी का डंका देश दुनिया में बज रहा है।
आखिर यह सब आजादी के बाद क्यों नहीं हुआ। किसानों के लिए पहले कोई व्यवस्था क्यों नहीं लागू की गई। प्रदेश में सवा दो महीने का कार्यकाल केंद्र सरकार के आदर्श मंत्र सबका साथ सबका विकास को प्रदेश सरकार ने ध्येय माना है।
पहली बैठक में एक लाख तक के किसानों के फसली ऋण माफ किया गया। प्रदेश में सर्वांगीण विकास होगा।