मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कहा कि काशी की गलियां, विरासत और धरोहरें यहां की पहचान है। मूलस्वरूप में बिना बदलाव किए इन्हें संवारने और सहेजने का काम चल रहा है। आगामी पांच से छह महीने में काशी की तस्वीर बदल जाएगी।
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि हम किसी जाति और मजहब के खांचे में रख कर विकास कार्य नहीं करते। हमारे विकास का पैमाना सबका साथ-सबका विकास है।
मुख्यमंत्री ने संकुल में तीन योजनाओं का शिलान्यास और दो योजनाओं का लोकार्पण किया। साथ ही किसान ऋण मोचन योजना के तहत किसानों को प्रमाणपत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि काशी ने धर्म-संस्कृति, कला-साहित्य और धरोहरों के रूप में देश-दुनिया को बहुत कुछ दिया है।
अब प्राचीनता और आधुनिकता में समन्वय बनाकर काशी को संवारना है। यहां के विकास के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हृदय, अमृत, प्रसाद योजनाओं के तहत विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को सचेत किया कि वे विकास कार्यों को तेजी से क्रियान्वित कराएं।
केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को साकार करने के लिए प्रशासन के साथ जन सहभागिता भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि चार नवंबर को काशी में देव दीपावली है।
अयोध्या के बाद काशी में इस महापर्व को और ज्यादा धूमधाम से मनाया जाएगा। देव दीपावली पर अलौकिक पल के भागीदार बनने के लिए वह काशी आने की कोशिश करेंगे।
मुख्यमंत्री ने काशी विद्यापीठ ब्लाक को ओडीएफ घोषित करते हुए कहा कि प्रदेश के शामली, गाजियाबाद, बिजनौर, हापुड़ और गौतम बुद्ध नगर सहित छह जिलों को खुले में शौचमुक्त कर दिया गया है।
नगर क्षेत्र के 111 स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का शिलान्यास करते हुए उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे स्वच्छता को अपनाएं और बच्चों को स्वच्छता का महत्व भी बताएं।
उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को सचेत किया कि वे चल रही योजनाओं को समय पर गुणवत्ता के साथ पूरा कराएं। मुख्यमंत्री ने अपने प्रख्यात ठुमरी गायिका गिरिजा देवी को नमन करते हुए अपने भाषण की शुरूआत की और श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी वाणी को विराम दिया।