शहर में तय किए गए चार रूट
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए शहर में चार रूट तय किए गए हैं। इसके तहत बाबतपुर एयरपोर्ट से लंका, राजघाट से लंका, कैंट से लंका और रामनगर से लंका होते हुए कैंट मार्ग पर इलेक्ट्रिक बसों की आवाजाही सुनिश्चित करने की कार्ययोजना बनाई गई है।
रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार, शहर की सड़कों पर अतिक्रमण और जाम इलेक्ट्रिक बसों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। इलेक्ट्रिक बसों के बेहतर रखरखाव के लिए सड़कों को अतिक्रमण और जाम से मुक्त रखना होगा।
ये होंगे फायदे
पर्यावरण और इससे जुड़ी भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इलेक्ट्रिक बसों अहम साबित हो सकती हैं। इनसे वायु और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इनमें लगे मोटर से कार्बन उत्सर्जन लगभग न के बराबर होता है। एक यूनिट बिजली से चार्ज होने पर यह बस एक किलोमीटर तक चलेगी। इससे डीजल के आयात पर होने वाला खर्च घटेगा।
अन्य वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों के मेंटेनेंस और रखरखाव पर कम खर्च आता है। इसे बहुत ज्यादा सर्विसिंग की जरूरत नहीं होती है। आम वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहन कम वाइब्रेट करते हैं और यात्रा सुविधाजनक होती है। इलेक्ट्रिक बस में आग लगने का खतरा नहीं होगा। डिस्प्ले बोर्ड से स्टापेज की जानकारी मिलेगी। सुरक्षा के लिहाज से बस में इमरजेंसी बटन लगा होगा और यात्री सीसी कैमरे की निगरानी में रहेंगे।