संस्कृत भारती की ओर से संस्कृत भारत समर्थ भारत विषयक संगोष्ठी का समापन
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1960 में रूस ने चंद्रमा पर यान भेजकर कहा था कि वहां जल नहीं है। जबकि भारतीय गणना के आधार पर हजारों साल से बता रहा है कि चंद्रमा जलकारक है। 2007 में जब दोबारा चंद्रमा पर यान गए तो उन्होंने कहां चंद्रमा पर जल है। विमानन शास्त्र का जिक्र हमारे यहां सदियों से है। जो आज साबित हो रहे हैं। बगैर पायलट के विमान का जिक्र किया गया है। ड्रोन उसी का प्रतिरूप है।
मुख्यमंत्री का स्वागत कर अध्यक्षता कर रहे संस्कृत भारती के अध्यक्ष डा. भक्तवत्सल ने पेन ड्राइव भेंट की। मंच पर राष्ट्रीय महामंत्री श्रीशदेव पुजारी और लोक कल्याण न्यास के अध्यक्ष डा. डीपी सिंह मौजूद रहे। अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कामत ने संगठन के क्रियाकलापों के बारे में बताया।
मुख्यमंत्री के सामने देश भर से आए संस्कृत गृहम के 40 परिवारों के बच्चों ने संस्कृत में वार्तालाप और भाषण किया। इससे प्रभावित होकर आशीर्वाद लेने पहुंचे बच्चों के सिर पर मुख्यमंत्री ने हाथ फेरा और प्यार से पूछा कहां से आए हो, क्या नाम है। बच्चों ने संस्कृत में ही जवाब दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग की परंपरा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व में स्थापित किया। 21 जून को 192 देशों ने इसे आत्मसात किया। इसी प्रकार हजारों वर्ष से चली आ रही कुंभ को प्रयागराज में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का रूप दिया जा रहा है। यह आयोजन केवल प्रयागराज, यूपी या भारत का नहीं बल्कि पूरे विश्व का होगा। छह लाख गांवों और 192 देशों को आमंत्रण भेजा जा रहा है। इस बार 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु आएंगे।