दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे मुख्यमंत्री ने रविवार को मंडलायुक्त सभागार में वाराणसी के विकास कार्य और कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक की। इस दौरान अधिकारियों की लापरवाही पर उन्हें जमकर फटकार लगाई।
उन्होंने कहा, लापरवाह अधिकारियों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है। यहां चल रही परियोजनाओं के विलंब होने पर अधिकारियों को अभियान चलाकर पूरा करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। शहर की सड़कों को सुधारने के लिए लोक निर्माण विभाग को 20 दिन की मोहलत दी। उन्होंने विश्वनाथ कॉरिडोर को काशी के अतीत से जोड़ने और विरासतों को सहेजने का निर्देश दिया।
मंडलायुक्त को उन्होंने निर्देश दिया कि हर परियोजना की स्थलीय समीक्षा के साथ जनता की सुरक्षा और संरक्षा के मानकों को पूरा कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा, हमारी पहली प्राथमिकता जनसुरक्षा है और इसके लिए सबको अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे।
समीक्षा बैठक में सीएम को बताया गया कि 30 जून 2018 तक 16 परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी। इसमें रिंग रोड 1, बाबतपुर वाराणसी फोरलेन, आईपीडीएस, कबीरचौरा हेरिटेज वाक सहित अन्य काम हैं। इसके बाद 31 दिसंबर 2018 तक 24 कामों को पूरा करने की बात मुख्यमंत्री को बताई।
इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फटकारते हुए कहा, आप लोगों की लापरवाही से काम समय पर पूरे नहीं होते। हर काम का लक्ष्य तय करके उसे समयसीमा में पूरा कराया जाए। छह माह पहले मुख्यमंत्री के भ्रमण की गई परियोजनाओं के पूरा होने की जानकारी दी गई।
बैठक में सेतु निगम से संबंधित हादसे का जिक्र किए बिना मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की समयबद्धता और सुरक्षा मानकों को लेकर जमकर नाराजगी जताई। शहर में भारी वाहनों के प्रवेश और चौराहों पर वसूली को लेकर नाराजगी जताई।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने सुबह सेंट्रल जेल में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का अनावरण किया। दोपहर तीन बजे मुख्यमंत्री वाराणसी से रवाना हो गए।