इसके पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए भूमि पूजन किए। उन्होंने कहा कि 700 वर्षों का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक समृद्ध परंपरा के नवीनीकरण के साथ आज काशी में हम सभी को जोड़ने का सौभाग्य मिला है।
मैं इस मौके पर संपूर्ण कार्यक्रम के प्रणेता आयोजक स्वामी राम कमलाचार्य वेदांती जी महाराज को बधाई देता हूं, जिन्होंने अपने गुरु विरासत को एक नया स्वरूप एक भव्य राम मंदिर के रूप में देने के इस कार्यक्रम के साथ हम सभी को जुड़ने का सौभाग्य दिया है। यह अवसर सभी के पास नहीं आता है।
हम सभी भारतवासी बहुत ही सौभाग्यशाली हैं। हमारी पीढ़ी भी सौभाग्यशाली है। हमारी स्पीड ने एक समृद्ध विरासत को अपनी आंखों में देखा है।
इन कार्यक्रमों को मूल रूप लेते हुए हम देख रहे हैं कि अब पिछले वर्ष ही 22 जनवरी 2024 को कई पीढ़ियां पूज्य संतों की एक लंबी विरासत देश संकल्प के साथ पूरा जीवन जी थी। उस संकल्प को मूर्त रूप लेते हुए अयोध्या धाम में हमने देखा है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमल से 500 वर्षों की विरासत को हमने श्रीराम जन्मभूमि के भव्य मंदिर के रूप में अयोध्या धाम में रामलीला के विराजमान होते हुए देखा।
राम जन्मभूमि आंदोलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नेतृत्व था। इसी क्रम में जगतगुरु स्वामी राम कमलाचार्य वेदांती जी महाराज ने कहा कि काशी में 1398 में श्रीराम मंदिर की स्थापना हुई थी। 1669 में औरंगजेब ने इसे ध्वस्त किया था। मंदिर काफी जीर्ण-शीर्ण हो गया है। सीएम योगी ने मंदिर के शिलान्यास का पूजन किया है।