पौराणिक नदी असि की पैमाइश के लिए जारी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश को अफसरों ने दबा दिया है। मुख्यमंत्री ने असि के उद्धार के लिए सिंचाई विभाग को पैमाइश कराने और उसके प्रवाह में आने वाली बाधाओं को दूर कराने का निर्देश दिया था लेकिन नापजोख तो दूर अभी तक इस दिशा में कुछ भी नहीं हो सका। इससे काशी में सीएम के निर्देशों को लेकर कार्यदायी संस्थाओं की संजीदगी का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
वर्ष भर पहले मुख्यमंत्री ने काशी की नदियों के उद्धार के मसले पर अफसरों, अभियंताओं और नदी विशेषज्ञों की बैठक लखनऊ में बुलाई थी। तब उन्होंने काशी में नाले में तब्दील हुई असि नदी की पीड़ा सुनकर इसके उद्धार के लिए अफसरों को निर्देशित किया था। उस बैठक में मौजूद रहे महामना मालवीय रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर गंगा मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. यूके चौधरी ने बताया कि मैंने सीएम को काशी के लिए असि नदी की अनिवार्यता के अलावा उसकी समस्याओं से अवगत कराया था। तब मुख्यमंत्री ने असि नदी को लेकर दिलचस्पी दिखाई थी। इतना ही नहीं जब मैंने बताया कि नदी की तलहटी में कई जगह अतिक्रमण कर उसके प्रवाह को बाधित कर दिया गया है, तब सीएम ने तत्कालीन डीएम के सामने भरोसा दिलाया था कि आठ किमी लंबी नदी को कंचनपुर ताल से लेकर अस्सी घाट तक खुदवा कर उसका उद्धार करा दिया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग को पैमाइश कराने का भी सीएम ने निर्देश दिया लेकिन न पैमाइश हुई और तो नदी की तलहटी की सफाई का ही काम शुरू कराया गया।