बिजली निगम के अधिकरियों के अनुसार रात को घरों में एसी, कूलर व अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग बढ़ने से लोड बढ़ जाता है। गर्मी में रोज औसतन बिजली की खपत 800 मेगावाट तक रहती है। वह बढ़कर 915 मेगावाट तक पहुंच गई। मानसून के दस्तक देते ही कटौती सामान्य हो जाएगी। तब मौसम भी लोगों का साथ देगा। लोगों का कहना है कि सर्दियों या गर्मी शुरू होने से पहले पर्याप्त तैयारी कर ली जाती तो भीषण गर्मी के दौरान बार-बार आपूर्ति बाधित नहीं होती।
शहर के चांदपुर, मंडुवाडीह, चौकाघाट, बेनिया, चेतगंज के चौरछठवां, कंदवा, भगवानपुर, चितईपुर, पांडेयपुर, नदेसर, सुंदरपुर, लंका, नरिया, दुर्गाकुंड, सोयेपुर, लालपुर, ओमनगर, पहड़िया, सामनेघाट, लहरतारा, औरंगाबाद, चौकाघाट में सबसे अधिक ट्रांसफॉर्मर जले। प्रमुख कारण लोड बढ़ना था। जो कि समय रहते नहीं बढ़ाया गया। मौसम में थोड़ा सुधार होते ही बिजली व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को कराई गई पड़ताल में चौबेपुर, वरुणापार, लोहता, बड़ागांव, रोहनिया, कछवां, राजातालाब में आपूर्ति सामान्य मिली।