राजातालाब (वाराणसी)। बभनियांव गांव में चल रहे खुदाई कार्य में गड्ढों से प्राचीन पुरावशेष मिलने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को उत्खनन में चूल्हा मिला। जिसे देखकर उत्खनन दल के लोग खुश दिखे वहीं गांव के लोग अचरज में पड़ गए। वहीं ताम्र पाषाण काल की कई सामग्रियां भी मिलीं।
गांव से मिट्टी के ऊपरी और निचली सतह से खाना बनाने में प्रयुक्त होने वाले मिट्टी के बर्तन के टुकड़े पहले ही मिल चुके हैं। चूल्हे मिलने पर इतिहास विदो ने अनुमान लगाया कि ताम्र पाषाण काल में लोग यहां रहते थे। उत्खनन में कटोरे और थालियां भी मिली है। जिनका रंग स्लेटी और धूसर है। यह बर्तन दो हजार 200 वर्ष पुराने बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही मिट्टी के बर्तन बनाने में उपयोग किए जाने वाला उपकरण मिला है। प्रोफेसर एके सिंह तथा प्रोफेसर एके द्विवेदी ने बताया कि खुदाई में ताम्र पाषाण काल की सामग्री मिली हैं। इससे सभ्यता और संस्कृति पर अध्ययन करने में मदद मिलेगी। बताया कि बभनियांव की खुदाई से मध्य गंगा घाटी के प्राचीन जीवनशैली सभ्यता और संस्कृति के बारे में भी पता चल पाएगा। गांव के प्रधान रत्नेश सिंह, स्वयंवर सिंह, उमाशंकर सिंह, अरुण प्रकाश, मुन्ना, दिनेश, आलोक सिंह का कहना थाकि वह ऐसे गांव में रह रहे हैं, जहां पर तीन हजार वर्ष पूर्व से प्राचीन सभ्यता के होने के सबूत मिल रहे हैं।