वोट डालने के लिए कतार में खड़े बच्चे।
बाल संसद के लिए सोमवार को तल्ख धूप के बावजूद बच्चा पार्टी ने 98 फीसदी मतदान का इतिहास रच दिया। बच्चों ने समाज को बड़ा संदेश भी दिया है। आम चुनावों में तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद जहां मतदान का प्रतिशत बमुश्किल पचास से साठ फीसदी तक पहुंच पाता है, वहीं बच्चों ने न सिर्फ बढ़-चढ़कर चुनाव में भागीदारी की बल्कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भाव भी जगाया। जीत-हार की मशक्कत हुई। एक-दूसरे की शिकायतें भी हुईं लेकिन कहीं कोई बैर-भाव नहीं। किसी बच्चे ने कतार तोड़ी तो साथी बच्चों ने ही उसे पीछे भेज दिया। जहां अभिभावकों ने दखल का प्रयास किया, बच्चों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं की।
विशाल भारत संस्थान की देखरेख में सोमवार को चौथी बाल संसद का चुनाव हुआ। आठ सांसद और एक स्पीकर पद के लिए मैदान में 35 प्रत्याशी थे और 16405 वोटर। शहर में बनाए गए 22 बूथों पर सुबह सात से दोपहर तीन बजे तक जमकर वोट बरसे। शहर को आठ संसदीय क्षेत्रों में बांटकर वोटिंग कराई गई। कई बच्चे नए कपड़ों में नजर आए। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर बच्चों को लाइन लग गई। दोपहर एक बजे तक 50 फीसदी मतदान हो चुका था।
22 बूथों के अलावा विकलांग और छोटे बच्चों के मतदान के लिए पूरे शहर में तीन मोबाइल बूथ भी लगाए गए थे। शक्कर तालाब स्थित मतदान केंद्र पर प्रत्याशियों के अभिभावक आपस में भिड़ गए थे। हुकुलगंज वरुणा नगरम केंद्र पर भी प्रत्याशियों के माता-पिता ने दखल का प्रयास किया, इससे करीब एक घंटे तक वहां मतदान नहीं हो सका।