सूर्योपासना के डाला छठ पर्व की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। घरों में षष्ठी माता के गीत गूंजने लगे हैं। व्रती महिलाएं व्रत के लिए प्रसाद बनाने के साथ ही पूजा के सामान की खरीददारी में जुट गई हैं। गंगा घाटों से लेकर घर -आंगन तक सफाई के साथ ही वेदियां चुन-चुन कर बनाई जा रही हैं। व्रती महिलाओं की दिनचर्या बदल गई है। नहाय-खाय के साथ चार नवंबर को डाला षष्ठी का व्रत आरंभ हो जाएगा। आस्था का पर्व जैसे -जैसे नजदीक आ रहा है, रिश्तेदारों, परिचितों के भी आने का सिलसिला शुरू हो गया है।
डाला छठ पर अस्सी घाट से लेकर विश्वसुंदरी पुल के नीचे गंगा घाटों तक लाखों महिलाएं अपने परिवार के साथ अर्घ्य देने जुटेंगी। लेकिन अभी तक घाटों की सफाई पूरी नहीं हो सकी है। सामने घाट की तरफ जाने वाला रास्ता तो जरूर बन गया लेकिन रास्ते में कीचड़ फैला है। जज गेस्ट हाउस से लेकर परमहंस घाट तक गाद के ढेर लगे हैं। परमहंस घाट से मदेरवा घाट तक बुधवार को सफाई कराई गई। भोजपुरी समाज के अध्यक्ष शोमनाथ ओझा ने बताया कि जिस तरह सिल्ट घाटों पर फैली है। हम मजदूरों को लगा कर सफाई कराई जा रही है।
ंडाल छठ के लिए बाजार सजने लगे हैं। डाला, सूप, बहंगी, चुनरी आदि की दूकानें सज गई हैं। इनकी बढ़ती मांग को देखते हुए आम दिनों की उपेक्षा दाम में 30 से 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। बाजार पर नजर डालें तो अच्छी गुणवत्ता के डाला की कीमत 150 रुपये, कामचलाऊ डाला करीब 45 रुपये में बिक रहा है। सूप 35 से 50 रुपये में तो चुनरी 50 से 100 रुपये तक उपलब्ध है। उधर पर्व को लेकर फलों के आढ़तियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। पहाड़िया मंडी में आम दिनों में 20 से 25 ट्रक फलों की आवक होती थी, लेकिन छठ को देखते हुए आढ़तियों ने 50 प्रतिशत तक मांग मांग बढ़ा दी है। मंडी में सेब, केला, अनार, अनानास और नारियल की आवक काफी हुई है। फल मंडी के अध्यक्ष किशन सोनकर ने बताया कि ठंड शुरू होते ही फलों के दाम में करीब 20 से 30 प्रतिशत की गिरावट आ जाती है। अब पर्व के आते ही दाम बढ़ गए हैं।