देश की माटी से भले ही दूर हों, लेकिन जड़ें तो यहीं से जुड़ी हुई हैं। अमेरिका में रहने वाले भारतवंशियों के मन में देश की संस्कृति, हिंदू धर्म के प्रति आस्था और प्रेम का ही परिणाम है कि सात समंदर पार भी लोक आस्था का महापर्व मनाया जाएगा। मियामी की गलियों में उग हो सुरुज देव...की स्वर लहरियां गूंजेंगी और भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा।
वाराणसी के विक्रांत सिंह और गुंजन सिंह अमेरिका में रहते हैं। इस बार वहीं पर छठ मनाएंगे। अमेरिका के मियामी शहर में बिहार के नेवादा निवासी अरविंद सिन्हा और सोनिया सिन्हा के आवास पर छठ का आयोजन होगा। पेशे से इंजीनियर विक्रांत सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के रहने वाले भारतीयों की जुटान होगी। बाकायदा टेंट व कुंड बनाकर छठ की तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोजन में स्पैनिश व अमेरिकी नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया है। हम लोग कई साल से छठ महापर्व मनाते आ रहे हैं। इस बार हम लोगों ने अमेरिका में छठ नाम से छठ गीत भी तैयार किया है। जिसे यू ट्यूब पर देखा जा सकता है।
छठ पूजा
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आस्था के आगे नतमस्तक बीमारी, कैंसर तो कोई शुगर से पीड़ित, फिर भी रखती हैं व्रत
बाबा विश्वनाथ की नगरी में छठ का उल्लास सड़क से लेकर गंगा घाटों तक दिख रहा है। अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, सूर्य सरोवर सहित अन्य कुंड, तालाबों के साथ ही कई जगहों पर लोग अस्थायी रूप से गड्ढा बनाकर, छत पर अस्थायी स्वीमिंग पूल बनाकर छठ पूजा करते हैं।
आस्था के इस महापर्व पर बीमारी भी बौनी पड़ जाती है। इसका जीता जागता उदाहरण है काशी की कुछ महिलाएं जिन्होंने कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए भी पर्व पर आस्था बरकरार रखी है।
22 वर्षों से जारी है व्रत की परंपरा
अर्दली बाजार निवासी किरण पाठक 22 वर्ष से छठ की परंपरा निभा रही हैं। पिछले साल कैंसर से जूझते हुए भी व्रत नहीं छोड़ा। किरण बताती हैं कि बचपन में मां और चाची व्रत करती थीं। तब भी पूजा के लिए सारे काम करती थी। शादी के बाद जब ससुराल आई तो उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पूजा शुरू की। पिछले साल कैंसर का पता चला तब भी सभी विधियां पूरी की थीं। इस साल भी अपने बच्चों व परिवार की सुख शांति की कामना के साथ व्रत रखा है।
छठ पूजा
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परिवार के सभी सदस्य उठाते हैं जिम्मेदारी
दशाश्वमेध निवासी नमिता तिवारी 15 साल से छठ पूजा कर रही हैं। वह बताती हैं कि छठ पर्व का व्रत काफी कठिन होता है। दीपावली के अगले दिन से ही रहन-सहन और खानपान में पवित्रता के नियम लागू कर दिए जाते हैं। परिवार के सभी सदस्य बड़ी जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। शुगर होने के कारण कई साल तक इंसुलिन पर रही, लेकिन छठ मइया की ऐसी कृपा रहती है कि व्रत के दौरान कभी कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई।