शहर और ग्रामीण इलाकों में शहीदाने कर्बला का चेहल्लुम मनाया गया। जगह-जगह से अलम और ताजिए का जुलूस निकाला गया। या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। सुबह से लेकर देर रात तक तकरीबन एक दर्जन जुलूस विभिन्न इलाकों में अकीदत के साथ उठाए गए।
दालमंडी चौक से अंजुमन हैदरी की ओर से निकाला गया जुलूस दरगाहे फातमान पर आकर समाप्त हुआ। अंजुमन जव्वहादिया का जुलूस कच्ची सराय और मातमी अंजुमन जव्वादिया (रजि) का जुलूस कालीमहल से उठकर दरगाहे फातमान पर समाप्त हुआ। रात में गोविंदपुरा से अलम, ताजिए का जुलूस उठकर दरगाहे फातमान पर समाप्त हुआ। अर्दली बाजार अंजुमन इमामिया की ओर से उठाए गए जुलूस में शहर की आठ अंजुमनों ने नौहा मातम किया। यहां रोड पर तकरीर और जंजीर का मातम हुआ। इसके अलावा शिवपुर से अंजुमन पंजतनी ने शाम को जुलूस उठाया।
दोषीपुरा से भी अलम ताजिए का जुलूस उठाया गया, यह सदर इमामबाड़ा लाट सरैया पर समाप्त हुआ। शिवाला में भी अलम-ताजिया, दुलदुल का जुलूस उठाया गया। मदनपुरा का जुलूस दरगाहे फातमान पर समाप्त हुआ।
उधर शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने बताया कि अरदईन के मौके पर इमाम हुसैन के कर्बला (इराक) स्थित रौजे पर बनारस समेत पूरी दुनिया के चार करोड़ से अधिक लोग मौजूद हैं। बनारस लौटने पर इन जाइरीन का सम्मान किया जाएगा।