वाराणसी। आने वाले दिनों में पर्यटकों को जंगल सफारी का आनंद चंदौली के चंद्रप्रभा अभयारण्य में मिलेगा। इसके लिए संरक्षित वन क्षेत्र को जंगल सफारी के रूप में विकसित किया जाएगा। जंगल में मौजूद वन्य जीव, पेड़, झरना, बांध सहित अन्य कई जानकारी के लिए पर्यटन से जूडे़ टूूरिस्ट गाइड को कानपुर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए बृहस्पतिवार को वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने सर्किट हाउस में वन अधिकारियों के साथ बैठक की।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन डॉ. अरुण कुमार सक्सेना दो दिवसीय दौरे पर बनारस आए हुए थे। इस दौरान उन्होंने डोमरी स्थित मियावकी विधि से पौधरोपण का निरीक्षण किया। इसके अलावा चंदौली के चंद्रप्रभा अभयारण्य का भी निरीक्षण कर सर्किट हाउस में बैठक की। बनारस और आस पास के जिलों में मौजूद जंगलों में पर्यटन को कैसे बढ़ावा दिया जा सके, इस बारे में पर्यटन और वन विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली। पर्यटन विभाग ने टूरिस्ट गाइड को जंगल और वन्य जीवों के बारे में प्रशिक्षण और चंद्रप्रभा अभयारण्य को जंगल सफारी के रूप में विकसित करने की सलाह दी। इसके बाद मंत्री ने अधिकारियों को कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया।
महावीर कौजलगी, प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि वन्य जीव और जंगलों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कानपुर में वन विभाग के ट्रेनिंग और रिसर्च सेंटर में टूरिस्ट गाइड को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा चंद्रप्रभा अभयारण्य में जंगल सफारी को विकसित करने के लिए निर्देश हुआ। जल्द ही कार्य योजना तैयार कर मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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चंद्रप्रभा में पाए जाने वाले वन्य जीव
चंद्रप्रभा के 78 वर्ग किलोमीटर के जंगल में पशु-पक्षियों की 650 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। नदियां, झरने और जल प्रपात भी हैं। यह अभयारण्य राष्ट्रीय वन्यजीव एक्शन प्लान (2002-2016) के अंतर्गत देश के 668 संरक्षित वन क्षेत्रों में से एक है। वर्ष 2016 में वन विभाग की कराई गई जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक यहां तेंदुआ 3, चिंकारा 123, घड़रोज 174, सांभर 101, भालू 104, सुअर 266, बंदर 445, लंगूर 335, मगरमच्छ तीन, भेड़िया तीन, लकड़बग्घा 55, लोमड़ी 102, सियार 175, मोर 150 और शाही 68 के करीब जानवर हैं।