इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने बलुआ थाने का घेराव किया, लेकिन लेागों के समझाने पर शांत हो गए थे। इसकी जांच करने पूर्व सीओ अवनीश चिंकारा जब टांडा बाजार पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनकी जीप को घेर लिया। किसी ने पत्थर चलाकर उनकी गाड़ी का शीशा तोड़ दिया। इसमें पुलिस ने सात नामजद व 70 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया था।
इसी क्रम में अज्ञात के रूप में पंकज मिश्रा को दो अप्रैल को पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया। पंकज के बड़े भाई नीरज मिश्रा व बहन ने बताया कि पंकज के जेल जाते ही उसकी आठ माह की गर्भवती पत्नी दीप्ती मिश्रा बेसुध हो गई और उसी गम में उसकी मृत्यु हो गई। पंकज व दीप्ती की तीन पुत्रियां प्रियांशी(11), पलक(9) और परी(3) हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सात नामजदों और 69 अज्ञात को छोड़कर अगर पुलिस केवल पंकज के खिलाफ कार्रवाई कर रही है तो अरुण शर्मा के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप की निष्पक्षतापूर्वक जांच कर दोषियों को सजा दिलानी चाहिए। उन्होंने पुलिस पर साजिश के तहत पंकज को फंसाकर जेल भेजने का आरोप लगाया है।
चंदौली के एसपी दयाराम ने बताया कि इस मामले में विवेचक ने किस कारण से अन्य लोगों के नाम केस से निकाला है और उक्त व्यक्ति पर कार्रवाई की है। इसकी जांच की जाएगी। अगर कुछ गलत पाया जाता है तो निश्चित ही कार्रवाई होगी।