शिकायत की जांच पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक के अधीन गठित सतर्कता प्रकोष्ठ से कराई गई। टीम ने रूबी प्रसाद की ओर से बताए गए पते बिहार के अररिया जिला अंतर्गत रानीगंज तहसील के हासा गांव में जाकर पूछताछ की। वहां मिले सुबोध राम ने रूबी प्रसाद को अपनी बेटी बताने से इनकार किया। अलबत्ता यह बताया कि उनकी बेटी रूबी के नाम से किसी ने यूपी में फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनाया है।
जांच समिति ने रिपोर्ट में बताया है कि रूबी प्रसाद मूल रूप से समस्तीपुर जिले के ग्राम वसुदेवा निवासी सुबोध सिंह की पुत्री हैं, जो जाति से राजपूत हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति के व्यक्ति से प्रेम विवाह किया है और इसी आधार पर तथ्यों को छिपाकर वर्ष 2007 में तहसील से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र हासिल कर लिया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव व राज्य स्तरीय स्क्रूटनी समिति के अध्यक्ष हिमांशु कुमार ने रूबी प्रसाद को जारी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निरस्त करने की संस्तुति करते हुए डीएम को निर्देश दिया है कि अनुचित लाभ लेने के मकसद से बनाए गए प्रमाण पत्र के संबंध में संबंधित अभ्यर्थी और प्रमाण पत्र जारी करने वाले राजस्व अधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित कराएं। इस बाबत जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव ने बताया कि प्रमुख सचिव का पत्र प्राप्त हुआ है। इसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इस बाबत पूर्व विधायक रूबी प्रसाद का कहना था कि उन्हें प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने की कोई जानकारी नहीं है। समिति की ओर से उनसे साक्ष्य मांगे गए थे, जिसे उन्होंने उपलब्ध करा दिए थे। पूर्व विधायक का कहना था कि इससे पहले भी हाईकोर्ट के निर्देशन में जांच हो चुकी है।
डीएम, कमिश्नर की जांच में भी शिकायत खारिज हो गई थी। अब शिकायतकर्ता एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी रंजिश के कारण ऐसा कर रहे हैं, जिससे हमारी छवि खराब हो। उन्होंने जांच कमेटी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब उपाध्यक्ष ही शिकायतकर्ता होंगे तो जांच निष्पक्ष कैसे हो सकती है।
गलत कार्य करने वालों की खैर नहीं
प्रमाण पत्र फर्जी मिलने की पुष्टि करते हुए एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान ने कहा कि प्रदेश में योगी सरकार है। इस सरकार में गलत कार्य करने वाले बच नहीं पाएंगे। रूबी प्रसाद ने भी भाजपा ज्वाइन कर ऐसा प्रयास किया था कि लेकिन इस सरकार में उनकी नहीं चली। योगी सरकार ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच कराई है।