दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानवापी में वर्ष 2019 में मूल वाद के एकमात्र जीवित वादी पंडित हरिहर पांडेय के विश्वास का लाभ उठाकर अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने वाद मित्र की नियुक्ति प्राप्त की।
ज्ञानवापी परिसर से जुड़े वर्ष 1991 के सबसे पुराने वाद में वर्ष 2019 में हुई वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिका पर बुधवार को अपर जिला जज (अष्टम) अमित कुमार तिवारी की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी प्रतिवादियों को स्थानांतरण संबंधी नोटिस जारी करने का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तिथि निर्धारित की।
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याचिकाकर्ता अनुष्का तिवारी ने अदालत में दायर रिवीजन याचिका में आरोप लगाया है कि वर्ष 2019 में मूल वाद के एकमात्र जीवित वादी पंडित हरिहर पांडेय के विश्वास का लाभ उठाकर अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने षड्यंत्रपूर्वक वाद मित्र की नियुक्ति प्राप्त की।
उनका कहना है कि नियुक्ति के बाद वाद को जिला न्यायालय में स्थानांतरित कर अन्य मामलों के साथ समेकित किए जाने का विरोध किया गया। साथ ही, राज्य सरकार, केंद्र सरकार और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट को पक्षकार नहीं बनाया गया, जिससे मुस्लिम पक्ष को लाभ मिला।