हिंदू वर्ष की अंतिम निशा दीपक की सात्विक रोशनी से जगमगा उठी। चैत्र प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 से पहले बुधवार को ही काशी भगवामय हो गई। नव संवत्सर 2083 की पूर्व संध्या पर शहर भर में दीपमालाएं जलाईं गईं। आरोग्य सुख, समृद्धि, प्रेम और सद्भाव की कामना की गई। ओम अंकित भगवा ध्वज से सजाएं गए मुख्य मार्ग, गलियों में हिंदू नव वर्ष मंगलमय हो का नारा गूंजा। बैनर, अल्पनाएं और रंगोलियां बनाईं गईं।
बुधवार को श्री लाट भैरव भजन मंडल की ओर से तुलसीदास मार्ग तेलियाना, हनुमान फाटक, बलुआबीर सड़क मार्ग के दोनों ओर दीपमालाएं सजाईं गईं। राम जानकी मंदिर के महंत रामदास ने मंदिर प्रांगण से दीप प्रज्ज्वलित कर दीपोत्सव का शुभारंभ किया।
संपूर्णानंद में धूप-दीप की उजास और दुर्गा मंत्रों की गूंज
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में नव संवत्सर की पूर्व संध्या पर आद्यशक्ति मां दुर्गा के पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप की उजास और मां दुर्गा आराधना से परिसर गूंज उठा। से पूरा परिसर भर उठा। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय नव संवत्सर केवल काल-गणना का प्रारंभ नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण, आत्मिक परिष्कार और नव-संकल्प का शुभ प्रतीक है। इस दाैरान भव्य गीत-संगीत भी हुए।