11 सितंबर, 2021 को गुजरात के गांधीनगर से महाकवि की जन्म शताब्दी पर इस पीठ की स्थापना की घोषणा की गई थी और देश दुनिया में काफी चर्चा का विषय भी बना था। इस घोषणा के बाद यूजीसी के माध्यम से विश्वविद्यालय को एक औपचारिक पत्र भेजा गया। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जब काशी तमिल संगम आयोजित हो रहा था, तो भारती पीठ पर काम करने के लिए 10 लाख 60 हजार रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई। यह राशि उस वित्तीय वर्ष में खर्च नहीं की जा सकी। 2023-24 में फिर से 10.60 लाख रुपये का फंड आया, इसमें पांच शिक्षकों की नियुक्ति की गई।