स्पाइनल ट्यूमर के इलाज के बजाय महिला की जांघ के पास चीरा लगा दिया गया। सर्जरी कर रही प्रो. अमित रस्तोगी की अगुवाई वाली टीम को तब अपनी गलती का एहसास हुआ, जब चीरा लगाने के बाद पता चला कि महिला के पैर में कोई समस्या नहीं है।
इसके बाद 7 मार्च को हुई गलत सर्जरी के करीब 10 दिन बाद, 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम को दोबारा (सही) सर्जरी करनी पड़ी। दूसरी सर्जरी के नौवें दिन, 27 मार्च को महिला की मौत हो गई। आईएमएस प्रशासन की ओर से कार्रवाई की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। महिला के पोते ने 1 अप्रैल को कुलपति और निदेशक से शिकायत की थी।
इस पर निदेशक द्वारा गठित पहली जांच कमेटी में प्रो. अमित रस्तोगी को ही चेयरमैन बना दिया गया, जबकि उनकी टीम ने सर्जरी की थी। बाद में दूसरी जांच कमेटी गठित करनी पड़ी। शिकायत के 15 दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करेगा। उधर, जिला प्रशासन ने भी मामले में रिपोर्ट मांगी थी, जिसे आईएमएस प्रशासन द्वारा भेज दिया गया है। रिपोर्ट में भी गलत सर्जरी की पुष्टि बताई जा रही है।
नीचे से ऊपर तक सभी आ सकते हैं जांच के दायरे में
ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी के मामले में दूसरी बार जांच कमेटी गठित की गई है। किन बिंदुओं पर जांच होगी और किन-किन लोगों से पूछताछ की जाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि चर्चा है कि इस मामले में सर्जरी से जुड़े कर्मचारी से लेकर डॉक्टर तक सभी जांच के दायरे में आ सकते हैं। ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि सर्जरी जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में हर स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है, फिर भी इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, यह जांच का विषय है।