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गलत सर्जरी का मामला: BHU...12 दिन में दो बार सर्जरी, दो बार बनी जांच कमेटी, कार्रवाई का इंतजार; मांगी रिपोर्ट

Fri, 17 Apr 2026 06:08 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: ट्रॉमा सेंटर में स्पाइनल ट्यूमर पीड़ित महिला की गलत सर्जरी के बाद मौत से हड़कंप है। 12 दिनों में दो ऑपरेशन हुए, पर लापरवाही सामने आई। शिकायत के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जांच कमेटियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जबकि रिपोर्ट में गलती की पुष्टि बताई जा रही है।
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ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीजों को इसी तरह का बैंड लगाया जाता है। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर से ग्रसित महिला की ऑर्थोपेडिक्स टीम द्वारा गलत सर्जरी करने के मामले में अब सभी की नजर कार्रवाई पर टिकी है। स्थिति यह है कि 12 दिनों के भीतर महिला की दो बार सर्जरी (एक बार गलत, दूसरी बार सही) हुई। इतना ही नहीं, शिकायत के बाद दो बार जांच कमेटी भी गठित की गई। गलत सर्जरी के बाद महिला की मौत भी हो गई। शिकायत के 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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ट्रॉमा सेंटर में हुई इस घटना के बाद सर्जरी करने वाली पूरी टीम (डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ) की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जाता है कि महिला को वार्ड में भर्ती करने से लेकर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में ले जाने और एनेस्थीसिया देने तक की प्रक्रिया के दौरान गंभीर चूक हुई। 

कुलपति और निदेशक से शिकायत की थी

स्पाइनल ट्यूमर के इलाज के बजाय महिला की जांघ के पास चीरा लगा दिया गया। सर्जरी कर रही प्रो. अमित रस्तोगी की अगुवाई वाली टीम को तब अपनी गलती का एहसास हुआ, जब चीरा लगाने के बाद पता चला कि महिला के पैर में कोई समस्या नहीं है।

इसके बाद 7 मार्च को हुई गलत सर्जरी के करीब 10 दिन बाद, 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम को दोबारा (सही) सर्जरी करनी पड़ी। दूसरी सर्जरी के नौवें दिन, 27 मार्च को महिला की मौत हो गई। आईएमएस प्रशासन की ओर से कार्रवाई की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। महिला के पोते ने 1 अप्रैल को कुलपति और निदेशक से शिकायत की थी। 

इस पर निदेशक द्वारा गठित पहली जांच कमेटी में प्रो. अमित रस्तोगी को ही चेयरमैन बना दिया गया, जबकि उनकी टीम ने सर्जरी की थी। बाद में दूसरी जांच कमेटी गठित करनी पड़ी। शिकायत के 15 दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करेगा। उधर, जिला प्रशासन ने भी मामले में रिपोर्ट मांगी थी, जिसे आईएमएस प्रशासन द्वारा भेज दिया गया है। रिपोर्ट में भी गलत सर्जरी की पुष्टि बताई जा रही है।

नीचे से ऊपर तक सभी आ सकते हैं जांच के दायरे में
ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी के मामले में दूसरी बार जांच कमेटी गठित की गई है। किन बिंदुओं पर जांच होगी और किन-किन लोगों से पूछताछ की जाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि चर्चा है कि इस मामले में सर्जरी से जुड़े कर्मचारी से लेकर डॉक्टर तक सभी जांच के दायरे में आ सकते हैं। ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि सर्जरी जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में हर स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है, फिर भी इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, यह जांच का विषय है।
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एक नजर में पूरा मामला
  • ट्रॉमा सेंटर में राधिका देवी नाम की दो महिलाएं भर्ती थीं। 71 वर्षीय महिला को स्पाइनल ट्यूमर था, जिन्हें न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती किया गया था, जबकि 82 वर्षीय दूसरी राधिका देवी को ऑर्थोपेडिक्स विभाग में भर्ती किया गया था।
  • 7 मार्च को न्यूरोसर्जरी वाली महिला का ऑर्थोपेडिक्स टीम ने गलत ऑपरेशन कर दिया। 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी टीम ने सही सर्जरी की। 27 मार्च को महिला की मौत हो गई।
  • 1 अप्रैल को महिला के पोते ने कुलपति और आईएमएस निदेशक से शिकायत की। पहली जांच कमेटी में प्रो. अमित रस्तोगी को चेयरमैन बनाया गया, बाद में उन्हें हटाकर प्रो. अजीत को जिम्मेदारी दी गई।
  • जिला प्रशासन ने भी ट्रॉमा सेंटर प्रशासन से रिपोर्ट मांगी, जिसमें गलत सर्जरी की पुष्टि बताई गई है। अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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