मामला ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जरी विभाग से जुड़ा है, जहां बलिया निवासी 71 वर्षीय राधिका देवी को स्पाइन कॉर्ड ट्यूमर के इलाज के लिए 25 फरवरी को भर्ती कराया गया था। वह प्रो. अनुराग साहू की देखरेख में वार्ड के बेड नंबर 29 पर भर्ती थीं। आरोप है कि 7 मार्च को आर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने, प्रो. अमित रस्तोगी के निर्देशन में, उनकी जांघ की सर्जरी शुरू कर दी, जबकि जांघ में कोई समस्या नहीं थी। सर्जरी के दौरान जब हड्डी सामान्य पाई गई तो डॉक्टर भी हैरान रह गए।
इसके बाद 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी टीम ने स्पाइन की सर्जरी की, लेकिन इलाज के दौरान 27 मार्च को राधिका देवी की मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के पोते मृत्युंजय पाल ने 1 अप्रैल को आईएमएस के निदेशक और कुलपति से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी।
मृत्युंजय का आरोप है कि प्रारंभिक जांच कमेटी में प्रो. अमित रस्तोगी को ही अध्यक्ष बना दिया गया था, जबकि उन्हीं की टीम पर गलत सर्जरी का आरोप है। बाद में विरोध के बाद प्रो. अजीत सिंह की अध्यक्षता में नई कमेटी गठित की गई। इस कमेटी ने 21 अप्रैल को उनका पक्ष सुना, लेकिन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच इसी तरह औपचारिकता बनकर रह गई, तो पीड़ित परिवार को न्याय मिलना मुश्किल होगा।