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ओवरलोडेड जेल: 5039 बंदियों की क्षमता, बैरक में रह रहे 8459, 29 महिलाओं के साथ रहते हैं उनके बच्चे

Thu, 18 Apr 2024 01:20 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

Varanasi News: बंदियों को मौसमी बीमारियों के दौर में भी परेशानी होती है। बंदी एक-दूसरे से संक्रमित हो जाते हैं। जेल अस्पताल में बेड कम होते हैं। इसके चलते बंदियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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वाराणसी जिला कारागार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बनारस, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल के नौ जिलों की जेल में क्षमता से ज्यादा बंदी हैं। बैरक में 5039 बंदी रखे जा सकते हैं, लेकिन 8459 रह रहे हैं। वाराणसी की जेल में सबसे ज्यादा बंदी हैं। यहां 971 की जगह 2150 बंदी रखे गए हैं। चंदौली के बंदी भी वाराणसी जिला कारागार में रखे जाते हैं।
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जेल प्रशासन के मुताबिक, बंदियों की ज्यादा संख्या से व्यवस्था बिगड़ती है। सुबह, शाम ज्यादा दिक्कत आती है। बाथरूम और टायलेट जाने के लिए बंदियों की लंबी कतार लगती है। गर्मी में समस्या और बढ़ जाती है। तबीयत खराब होने पर जेल अस्पताल में ढंग का इलाज तक नहीं मिल पाता है। 

मरहम-पट्टी के साथ दवाइयां कम पड़ जाती हैं। अलग-अलग जेलों में 389 महिला बंदी भी रखी गई हैं। इनमें 29 महिलाएं ऐसी हैं, जिनके बच्चे भी रहते हैं। शासन-प्रशासन जेल की क्षमता बढ़ाने की बात कहता है, लेकिन अमल नहीं होता है। जेल में ज्यादा बंदियों के रखे जाने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
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जिला  क्षमता  पुरुष बंदी  महिला बंदी मां के साथ रहने वाले बच्चे
वाराणसी  971 2049  95  06
जौनपुर  320  908  40  00
सोनभद्र  550  944  45  08
आजमगढ़  1244  1395  80  02
भदोही  163  360  10  
मऊ  540  672  14  01
मिर्जापुर  400  669  31  02
गाजीपुर  512  890  46  09
बलिया  339  572  28  01

बोले अधिकारी
बनारस जिला कारागार की क्षमता बढ़ाकर 950 से ज्यादा की गई है। चंदौली में कारागार के लिए जमीन चिन्हित हो गई है। वहां कारागार के बनते ही बनारस में दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। - आचार्य डॉ. उमेश सिंह, वरिष्ठ अधीक्षक, जिला कारागार, वाराणसी।
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