कबीर एसोसिएशन ऑफ टोरंटो की ओर से वहां कबीर मंदिर बनाने की तैयारी है। यह कनाडा का पहला मंदिर होगा। इसमें कबीरदास की तीन फीट में मूर्ति स्थापित की जाएगा। मंदिर बनने के बाद यहां सत्संग, भजन-कीर्तन के अलावा चौका, पूजा और आरती भी होगी। कनाडा में 10 हजार कबीर के अनुयायी हैं। आचार्य हजूर अर्धनाम साहेब ने बताया कि अनुयायियों ने अमेरिका में भी कबीर सत्संग सेंटर और मंदिर बनवाने की मांग की है।
त्रिनिदाद और टोबैगो में है ज्यादा अनुयायी
विदेशों में सबसे ज्यादा 25 हजार से अधिक त्रिनिदाद और टोबैगो में कबीर के अनुयायी हैं। यहां उनकी छह शाखाएं संचालित हैं। इसके बाद पाकिस्तान में दो शाखाएं हैं। बांग्लादेश, नेपाल, मारीशस, फिजी, न्यूजीलैंड, अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज आदि देशों में भी कबीरपंथ के अनुयायी हैं। यहां आश्रम, मठ और मंदिर हैं।
महाकुंभ में देश-विदेश से आए कबीरपंथी भी डुबकी लगा रहे हैं। अब तक भारत के अलावा विदेशों से 40 से अधिक अनुयायी आ चुके हैं। न्यूजीलैंड के राजेश कुमार व रोशनी, ऑस्ट्रेलिया के मनोज प्रसाद व सुनीता, अमेरिका के मधुवेन, इंग्लैंड के नाथालाल समानी आदि अनुयायी महाकुंभ में डुबकी लगाने के बाद काशी आए और कबीर प्राकट्य स्थल पर मत्था टेका।
न्यूजीलैंड के मनोज और रोशनी ने बताया कि न्यूजीलैंड के लोग भी कबीर के सत्संग व भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं। वहां नॉर्थ न्यूजीलैंड में ज्यादा अनुयायी हैं। बताया कि हमारी छठवीं पीढ़ी वहां रह रही है। वह मूल रूप से अयोध्या के हैं।